पैलेट गन विवाद के बीच CRPF महानिदेशक ने बढ़ाया बल का मनोबल, बोले- जवानों के हर फैसले की जिम्मेदारी मेरी
Sandesh Wahak Digital Desk: नीट पेपर लीक विवाद के दौरान 20 जुलाई को संसद मार्च कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक हलकों में घमासान जारी है। संसद में विपक्ष जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के प्रमुख ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का एक बड़ा और बेहद स्पष्ट बयान सामने आया है। महानिदेशक के इस बयान से पिछले कई दिनों से राजनीतिक आरोपों का सामना कर रहे जवानों और अधिकारियों का मनोबल काफी बढ़ा है।
कर्तव्य निभाएं, जवाबदेही की चिंता मुझ पर छोड़ें
CRPF के एक अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने अपने जवानों को भरोसा दिलाया कि कानून-व्यवस्था संभालने या किसी भी ऑपरेशन के दौरान ईमानदारी से लिए गए फैसलों की पूरी जिम्मेदारी वे स्वयं लेंगे। उन्होंने कहा, जवान बिना किसी डर या मानसिक दबाव के अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करें। जहां भी किसी कार्रवाई पर जवाबदेही तय करने की बात आएगी, वहां बल के प्रमुख के रूप में मैं खुद आगे खड़ा रहूंगा।
सुधार की गुंजाइश, लेकिन प्रक्रिया का हुआ था पालन
जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के बाद बल के भीतर एक समीक्षा की गई। समीक्षा में यह पाया गया कि जवानों को मोर्चे पर तैनात करने से पहले ब्रीफिंग (जानकारी) और बेहतर होनी चाहिए। साथ ही, जम्मू-कश्मीर जैसे इलाकों से स्थानांतरित होकर आए जवानों को तुरंत उग्र भीड़ नियंत्रण में लगाने से बचा जाना चाहिए, क्योंकि दोनों जगहों की कार्यशैली और चुनौतियां भिन्न होती हैं।
जांच में बड़ा खुलासा: CRPF की विस्तृत जांच में यह साबित हुआ है कि 20 जुलाई की घटना में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पूरी तरह पालन किया गया था।
उपद्रवियों को रोकने के लिए सबसे पहले मौखिक चेतावनी दी गई, फिर आंसू गैस के गोले दागे गए और लाठीचार्ज किया गया। जब स्थिति पूरी तरह बेकाबू होने लगी, तब दिल्ली पुलिस के सक्षम अधिकारी (जिन्हें एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार प्राप्त थे) से विधिवत लिखित अनुमति मिलने के बाद ही आरएएफ (RAF) ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया था।
कानूनी संरक्षण और नेतृत्व का संदेश
मामले का कानूनी पहलू भी स्पष्ट है कि यदि बल प्रयोग को लेकर किसी जवान पर चोट पहुंचाने या अन्य धाराओं में मामला बनता भी है, तो महानिदेशक की औपचारिक स्वीकृति के बिना अभियोजन (Prosecution) संभव नहीं है। महानिदेशक यह स्पष्ट कर सकते हैं कि जवानों ने कानून के दायरे में और ऑन-ड्यूटी परिस्थितियों की आवश्यकतानुसार कार्रवाई की थी।
लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन जब प्रदर्शन की आड़ में बैरिकेड तोड़े जाएं, संसद की ओर जबरन बढ़ने का प्रयास हो और सुरक्षा बलों पर हमले हों, तो कानून-व्यवस्था कायम रखना राज्य का प्राथमिक दायित्व बन जाता है। महानिदेशक के इस कड़े व स्पष्ट रुख ने यह संदेश दे दिया है कि नियमों के तहत काम करने वाले जवानों के पीछे उनका नेतृत्व मजबूती से खड़ा है, वहीं यह प्रदर्शनकारियों के लिए भी चेतावनी है कि विरोध की आड़ में अराजकता स्वीकार नहीं की जाएगी।
Also Read: UPTET Result 2026: लाखों अभ्यर्थियों का इंतजार जल्द होगा खत्म, जानें कब और कहां देखें रिजल्ट

