स्वास्थ्य विभागः एक्शन में ईडी, अफसरों में धुकधुकी

Lucknow News: यूपी में स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नजरें टेढ़ी हो गयीं हैं। ईडी के लखनऊ जोनल दफ्तर ने प्रीवेंशन ऑफ मनी लांडिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दो नयी ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज करके जांच शुरू की है।

ईडी का पत्र स्वास्थ्य विभाग पहुंचते ही अफसरों में हड़कंप मच गया है। पहला केस बहराइच के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव से जुड़ा है। ईडी ने देवीपाटन मंडल के चारों जिलों के अस्पतालों का ब्योरा मांगा है। वहीं दूसरा केस मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन (यूपीएमएससीएल) में चिकित्सा उपकरणों और दवाओं के टेंडरों में भ्रष्टाचार से जुड़ा है। ईडी ने कार्पोरेशन के घोटालों पर ‘संदेश वाहक’ के सिलसिलेवार खुलासों का संज्ञान लेकर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज करते हुए यह जांच शुरू की है।

स्वास्थ्य विभाग में ईडी की एंट्री से उन अफसरों की भी उलटी गिनती शुरू हो गयी है। जिन्होंने बीते वर्षों में कंपनियों के साथ साठगांठ करके सैकड़ों करोड़ के ठेकों में गोलमाल करके कमीशनखोरी की कलंक कथा लिखी है। ईडी की जांच का दायरा बेहद विस्तृत है। करीब आठ वर्षों के दौरान कंपनियों को बांटे गए दवा-उपकरण के हजारों करोड़ के ठेके मनी लांड्रिंग की जांच के रडार पर आ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग से लेकर एनएचएम तक से दवाओं और उपकरणों की खरीद के लिए सालाना हजार करोड़ से ऊपर का बजट मेडिकल कार्पोरेशन को जारी किया जाता है। ईडी के पत्र पर अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। कितना बजट कार्पर्पोरेशन में जा रहा है। इस पर भी कोई बोलने को तैयार नहीं है।

ईडी ने स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण को भेजे पत्र में पूछा है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर अभी तक यूपीएमएससीएल ने कितनी फर्मों/कंपनियों को टेंडर आवंटित किये हैं। फर्मों के द्वारा टेंडरों के सापेक्ष कितनी दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की गयी है। कंपनियों को कितना फंड जारी किया गया है। साथ ही कंपनियों के द्वारा अधोमानक दवाओं की आपूर्ति व कुल बजट के साथ ही अथॉरिटी द्वारा की कार्रवाई का ब्योरा भी तलब किया है। ईडी ने टेंडरों के सापेक्ष कार्पोरेशन में 2019-20 से लेकर अभी तक जमा सभी बैंक गारंटी का विवरण मांगा है।

‘संदेश वाहक’ ने यूपीएमएससीएल में फर्जी बैंक गारंटी पर करोड़ों के दवा ठेकों के खेल का खुलासा किया था। जिसके बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सख्त रुख अपनाते हुए अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अमित घोष को जांच के आदेश दिए। नतीजतन कार्पोरेशन के एमडी उज्जवल कुमार ने आरोपी दवा कम्पनी बोकेम हेल्थकेयर के खिलाफ सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मुकदमा दर्ज कराया। इसी एफआईआर को ईडी ने आधार बनाकर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया है। इस संगीन मामले में कार्पोरेशन के अफसरों को बचाने के उच्चस्तरीय प्रयास हो रहे हैं। ईडी ने अफसरों से प्रत्येक वर्ष और बजटवार ब्योरा मांगा है।

दवाओं और उपकरणों का बजट एनएचएम से भी जारी होता है। इसलिए स्वास्थ्य महानिदेशक ने ईडी का पत्र एनएचएम एमडी डॉ. पिंकी जोवेल और यूपीएमएससीएल एमडी डॉ. उज्जवल कुमार को भेजते हुए जानकारियां मांगी हैं। 15 दिन बीतने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग से ईडी को कोई भी जानकारी नहीं भेजी गयी है। ईडी ने जानकारियां दस्तावेज पीएमएलए एक्ट के सेक्शन 54 का हवाला देते हुए तलब की हैं। दस्तावेज मिलने के बाद ईडी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों, कंपनियों के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी भी कर सकती है।

एनएचएम, यूपीएमएससीएल के एमडी को पत्र भेजाः डीजी

स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी) डॉ. पवन कुमार अरुण ने कहा कि ईडी का पत्र आया है। एनएचएम व यूपीएमएससीएल के एमडी को पत्र भेजकर जानकारियां मांगी गयी हैं। डीजी से पूछा गया कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति और देवीपाटन मंडल के जिलों से जुडीं सूचनाएं क्यों नहीं दी गयीं। उन्होंने कहा कि वित्त नियंत्रक से सूचनाएं देने को कहा है। वित्त नियंत्रक दीपक सिंह ने कहा कि सूचनाएं जुटायीं जा रही हैं।

पूर्व विधायक पर शिकंजा, चार जिलों का ब्योरा मांगा

जेल में बंद बहराइच के पूर्व विधायक व मेडिसिन किंग मुकेश श्रीवास्तव पर भी शिकंजा कसा है। एनआरएचएम घोटाले में ईडी ने मनी लांड्रिंग का केस दर्ज करते हुए जांच शुरू की है। स्वास्थ्य विभाग से पूछा है कि श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा व बलरामपुर के सरकारी अस्पतालों को 2013 से 2026 के बीच दिए बजट व उपभोग की जानकारी दी जाए। इस दौरान दी गयी चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भी पूरा ब्योरा मांगा है।

सिंडिकेट के दबाव में सारे नियम-कानून ठेंगे पर

ईडी की मनी लांडिंग जांच के घेरे में कई आईएएस समेत विभागीय अफसर हैं। मेडिकल कार्पोरेशन में एमडी से चेयरमैन तक आईएएस हैं। ईडी का पत्र देखने के बाद अफसरों को मानो सांप संघ गया है। उन्हें डर सता रहा है कि कहीं पहले के घोटालों की पोल पट्टी न बाहर आ जाए। अफसरों ने बीते वर्षों में बेहिसाब लूट की कलंक कथा लिखते हुए सम्पत्तियां तक बनायी हैं। चहेती कंपनियों को टेंडरों से नवाजने के लिए नियम कानून मानो गिरवी रख दिए गए। महंगी दवाओं से लेकर शर्तों में खेल करके चिकित्सा उपकरणों-दवाओं के ठेके कमीशन देने वाली खास कंपनियों को दिलाये गए।

कई अफसरों ने फंसने के डर से कार्पोरेशन को अलविदा भी बोला। सालाना तकरीबन 850 करोड़ के टेंडरों की एवज में कंपनियां बैंक गारंटी जमा करती हैं। कोरोनाकाल के दौरान भी अफसरों के ऊपर आपदा को अवसर में बदलते हुए एक से बढ़कर एक घोटालों का कुचक्र रचने का आरोप है। यूपीएमएससीएल में दवा व उपकरण माफिया के संगठित सिंडिकेट की ईडी अफसरों ने गहराई से जांच की तो स्वास्थ्य विभाग का सबसे बड़ा घोटाला बेनकाब होते देर नहीं लगेगी।

रिपोर्ट- मनीष श्रीवास्तव

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