भारतीय हॉकी जर्सी का नीले से केसरिया में बदलाव, विपक्ष ने साधा निशाना
Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी के रंग को नीले से केसरिया में बदलने का फैसला सियासी गलियारों में बड़ा विवाद बन गया है। हॉकी इंडिया द्वारा नई जर्सी जारी करने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, राजद सांसद सुधाकर सिंह, समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। वहीं, हॉकी इंडिया ने सफाई देते हुए कहा कि यह बदलाव पूरी तरह तकनीकी कारणों से किया गया है, जिसमें कोच और खिलाड़ियों की सलाह शामिल थी। पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने इस कदम को शर्मनाक बताया है, जबकि यूपी के मंत्री संजय निषाद ने इसे भारतीय पहचान से जोड़ा है।

इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश: प्रियंका गांधी
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में इस बदलाव को इतिहास बदलने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा, चाहे वे यूनिफॉर्म बदलें या शिक्षा नीति के जरिए इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश करें, वे कुछ भी करें, इस देश के युवाओं ने अपनी राय साफ कर दी है। आपने देखा कि जंतर-मंतर पर जमा युवा क्या कह रहे थे? वही देश की आवाज है। उन्होंने आगे कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई अहिंसा और सच्चाई पर आधारित थी, जिसमें RSS की कोई भूमिका नहीं थी, और कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में उस आंदोलन का संचालन किया था।
नीली जर्सी है भारतीय हॉकी की पहचान और विरासत
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए लिखा, हॉकी इंडिया ने कई अच्छे काम किए हैं… लेकिन यह शर्मनाक है। भारतीय टीम की पहचान और विरासत हमेशा से नीला रंग रही है। मैंने कई सालों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी है। फैंस हमारी भारतीय टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं। नारंगी रंग का क्या लॉजिक है? उनके इस बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
राजद-सपा नेताओं ने भी कसा तंज
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने तंज कसते हुए कहा, ये लोग मानसिक रूप से दिवालिया हैं। ये लोग पेड़ों को भी हरे रंग से भगवे रंग में रंगेंगे। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने कहा, जिस जर्सी को पहनकर भारतीय टीम इतने सालों तक खेलती रही है, उससे भावनात्मक लगाव होना स्वाभाविक है। हालांकि, हॉकी इंडिया फेडरेशन इस बदलाव के पीछे की वजह बता सकता है।
केसरिया है भारत की पहचान: संजय निषाद
इस पूरे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने हॉकी इंडिया के फैसले का समर्थन करते हुए कहा, “भारत क्रांतिकारियों की धरती है… केसरिया रंग भारत की पहचान का एक अहम हिस्सा है, और इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि केसरिया रंग को लेकर इस तरह की प्रतिक्रिया देश की विरासत को समझने में विफलता है।
हॉकी इंडिया ने तकनीकी कारणों का दिया हवाला
हॉकी इंडिया ने विवादों के बीच एक आधिकारिक बयान जारी करके सफाई दी है। फेडरेशन ने कहा कि यूनिफॉर्म का रंग बदलने का फैसला सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों की सलाह और उनसे विस्तार से बातचीत के आधार पर लिया गया था। मुख्य वजह तकनीकी थी नीली प्लेइंग यूनिफॉर्म, नीली सिंथेटिक प्लेइंग सतह (जो अब अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों का मानक रंग है) के साथ घुल-मिल जाती थी, जिससे खिलाड़ियों को मैदान पर साफ-साफ देखने में दिक्कत होती थी।
कोच और खिलाड़ियों ने सुझाया केसरिया रंग
हॉकी इंडिया ने आगे बताया कि कोच और खिलाड़ियों ने पीले या केसरिया जैसे दूसरे रंगों का सुझाव दिया। अच्छी तरह विचार-विमर्श के बाद केसरिया रंग को फाइनल किया गया, क्योंकि यह न केवल तकनीकी जरूरत को पूरा करता है, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में से एक होने के नाते साहस, त्याग और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है।
पहले भी बदल चुका है जर्सी का रंग
हॉकी इंडिया ने यह भी स्पष्ट किया कि जर्सी का रंग बदलना कोई नई बात नहीं है। 2014 FIH हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान टीम की जर्सी का रंग पीला किया गया था और 2018 FIH हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान इसे आसमानी नीला कर दिया गया था। इसलिए, यह बदलाव असामान्य नहीं है और पूरी तरह खेल की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है।
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