800 की क्षमता वाली ओपन जेल में सिर्फ 316 बंदी, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन यानी खुली जेलों की खराब व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामा उम्मीदों के मुताबिक नहीं है। अदालत ने सवाल उठाया कि प्रदेश में खुली जेलों की सुविधा का सही तरीके से इस्तेमाल क्यों नहीं हो पा रहा है।
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 26 फरवरी के आदेश (सुहास चकमा बनाम भारत संघ) के अनुपालन से जुड़ा है।
लखनऊ मॉडल जेल में 800 की क्षमता, सिर्फ 316 कैदी
कोर्ट ने बताया कि उत्तर प्रदेश में फिलहाल केवल लखनऊ स्थित मॉडल जेल ही ओपन जेल के रूप में काम कर रही है। इसकी क्षमता 800 बंदियों की है, लेकिन यहां सिर्फ 316 कैदी रखे गए हैं। राज्य सरकार यह भी स्पष्ट नहीं कर सकी कि इन बंदियों के चयन का आधार क्या था और बाकी 484 सीटें कब तक भरी जाएंगी।
हाईकोर्ट ने महिला बंदियों को केवल लिंग के आधार पर खुली जेल की सुविधा से दूर रखने पर भी आपत्ति जताई। कोर्ट ने इसे अस्वीकार्य बताते हुए सरकार को अपनी नीति में सुधार करने के निर्देश दिए।
चार राज्यों की व्यवस्था का मांगा तुलनात्मक विवरण
कोर्ट ने महाराष्ट्र, राजस्थान और केरल की खुली जेल व्यवस्था का जिक्र किया, जहां कैदियों को परिवार के साथ रहने, खेती करने, रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) की रिपोर्ट के अनुसार यूपी में खुली जेलों की क्षमता का केवल 27 फीसदी उपयोग हो रहा है, जबकि राज्य में 80 हजार से ज्यादा कैदी सजा काट रहे हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को कम से कम दो नई खुली जेल स्थापित करने पर विचार करने और महानिदेशक जेल से चारों राज्यों की तुलना वाली विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
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