मानसून सत्र में योगी सरकार को घेरेगी सपा, अखिलेश बोले- 10 वर्षों में बंद हुए 26 हजार से ज्यादा स्कूल
Lucknow News: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आगाज़ से ठीक पहले समाजवादी पार्टी (सपा) ने राज्य सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है। रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी की रणनीति स्पष्ट करते हुए बताया कि विपक्ष सदन में शिक्षा, बेरोजगारी, गिरती कानून-व्यवस्था, पेपर लीक और आरक्षण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को मजबूती से घेरेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा के सभी विधायक विधानसभा में इन जनहित से जुड़े विषयों को प्रखरता से उठाएंगे।
शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने की साजिश
अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार योजनाबद्ध तरीके से सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है, ताकि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्ग के बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाएं। उन्होंने दावा किया कि बीते 10 वर्षों के दौरान प्रदेश में 26,386 सरकारी विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। इसका सीधा असर छात्रों के नामांकन पर पड़ा है और करीब 28 लाख बच्चों की संख्या घटी है, जिसमें 25 लाख से अधिक बच्चे एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से आते हैं। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पहले जहाँ सरकारी स्कूलों में 1.17 करोड़ छात्र नामांकित थे, वहीं अब यह आंकड़ा सिमटकर 89 लाख पर आ गया है।
शिक्षकों के लाखों पद खाली, नई भर्तियों पर रोक
प्रदेश में अध्यापकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में राज्य में लगभग 4 लाख शिक्षक कार्यरत थे, जिनकी संख्या अब घटकर 3.46 लाख ही रह गई है। सरकार न तो नए पदों को मंजूरी दे रही है और न ही रिक्त सीटों को भर रही है। उन्होंने कहा कि 1.20 लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और अकेले 81 हजार प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों का अकाल है। लखीमपुर खीरी में सबसे ज्यादा 758 और मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में लगभग 500 स्कूल बंद हुए हैं। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी सरकारी विद्यालयों पर ताले लगे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सच्चाई छुपाने के लिए सरकार ने संबंधित डेटा वाली वेबसाइट ही बंद कर दी है।
छात्राओं की घटती संख्या और बदहाल बुनियादी ढांचा
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने छात्राओं की शिक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में छात्राओं का नामांकन 61.57 लाख से घटकर मात्र 45 लाख रह गया है। 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का दावा करने वाली सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के 7 हजार स्कूलों में बिजली कनेक्शन तक नहीं है, 2,300 विद्यालयों में शौचालय नहीं बने हैं, 576 स्कूलों में पीने के पानी की किल्लत है और 23 हजार से अधिक विद्यालय बिना कंप्यूटर के चल रहे हैं।

