Lucknow News: SGPGI ने रचा इतिहास, यूपी की पहली नेविगेशन-गाइडेड ऑर्बिटल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफल
पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट और ओ-आर्म तकनीक से जटिल चेहरे की विकृति का हुआ सटीक इलाज
Lucknow News: संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर ने क्रैनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
संस्थान में उत्तर प्रदेश की पहली इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन-गाइडेड, पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट और ओ-आर्म इमेजिंग आधारित सेकेंडरी ऑर्बिटल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इस अत्याधुनिक तकनीक ने जटिल चेहरे की विकृति के इलाज में नई उम्मीद जगाई है।
यह जटिल सर्जरी एसजीपीजीआई के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग की टीम ने ऐसे मरीज पर की, जो पुराने चेहरे के गंभीर आघात के कारण दोहरा दिखाई देने, चेहरे की असमानता और अन्य कार्यात्मक समस्याओं से जूझ रहा था।
सर्जरी के दौरान इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन तकनीक की सहायता से मरीज के प्री-ऑपरेटिव सीटी स्कैन और वास्तविक शारीरिक संरचना का रियल-टाइम मिलान किया गया।
इसके बाद मरीज के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट को अत्यंत सटीकता के साथ प्रत्यारोपित किया गया।
ओ-आर्म इमेजिंग से तुरंत हुई गुणवत्ता की जांच
ऑपरेशन पूरा होने के बाद ओ-आर्म इमेजिंग तकनीक के जरिए इम्प्लांट की स्थिति और पुनर्निर्माण की गुणवत्ता का तत्काल मूल्यांकन किया गया।
इससे सर्जरी की सटीकता सुनिश्चित हुई और भविष्य में दोबारा सुधारात्मक ऑपरेशन की संभावना भी काफी कम हो गई।
निदेशक ने टीम को दी बधाई
एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता संस्थान की आधुनिक तकनीक, नवाचार और उत्कृष्ट रोगी देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
इस सर्जरी का नेतृत्व डॉ. कुलदीप विश्वकर्मा और डॉ. भरत शुक्ला ने किया।
संस्थान के अनुसार, इस उपलब्धि के बाद अब उत्तर प्रदेश के मरीजों को जटिल पोस्ट-ट्रॉमेटिक चेहरे की विकृतियों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा और उन्हें अपने ही प्रदेश में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
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