JPSC Protest: झारखंड में केंद्र खुद से क्यों नहीं भेज सकती CBI? दिलचस्प है कानूनी पेंच

Jharkhand Protest: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को विधानसभा के करीब पहुंच गया। 25 जुलाई से चल रहे प्रदर्शन के बीच छात्र लगातार परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग पूरे मामले की CBI जांच है।

रविवार को सरकार और छात्रों के बीच छठे दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन CBI जांच के मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। सरकार का दावा है कि छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन JSSC-CGL की CBI जांच कराने की स्थिति में वह नहीं है। दूसरी ओर, छात्र नेता रवींद्र पासवान समेत आंदोलनकारी साफ कर चुके हैं कि CBI जांच के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा।

सरकार CBI जांच से क्यों पीछे हट रही है?

झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार का तर्क है कि JSSC-CGL परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आयोजित हुई थी। ऐसे में राज्य सरकार अपने स्तर से इस परीक्षा को रद्द करने या इसकी CBI जांच कराने का फैसला नहीं कर सकती।

फिलहाल मामले की जांच झारखंड CID कर रही है। इस केस में कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। सोमवार को CID ने JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को भी गिरफ्तार किया। इसके बावजूद छात्र CBI जांच की मांग पर कायम हैं।

केंद्र सरकार सीधे CBI को क्यों नहीं भेज सकती?

JPSC Protest: झारखंड में केंद्र खुद से क्यों नहीं भेज सकती CBI? दिलचस्प है कानूनी पेच

यहीं से इस पूरे मामले का दिलचस्प कानूनी पेच शुरू होता है। आमतौर पर CBI को केंद्र की जांच एजेंसी माना जाता है, लेकिन किसी राज्य में जांच करने की उसकी शक्तियां पूरी तरह असीमित नहीं हैं।

CBI का गठन Delhi Special Police Establishment Act, 1946 के तहत हुआ है। इस कानून की धारा 5 केंद्र सरकार को CBI की जांच शक्तियां राज्यों तक बढ़ाने का अधिकार देती है। लेकिन धारा 6 के तहत किसी राज्य के क्षेत्र में CBI की जांच के लिए उस राज्य की सहमति जरूरी होती है।

झारखंड ने नवंबर 2020 में CBI को दी गई अपनी सामान्य सहमति (General Consent) वापस ले ली थी। ऐसे में अब CBI को राज्य में किसी मामले की जांच शुरू करने के लिए झारखंड सरकार की सहमति की जरूरत पड़ सकती है।

हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया तो…

इसका मतलब यह नहीं है कि CBI झारखंड में जांच कर ही नहीं सकती। अगर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट किसी मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश देता है, तो राज्य सरकार की सहमति की जरूरत नहीं रहती।

यही वजह है कि JPSC-JSSC विवाद में छात्रों की CBI जांच की मांग और सरकार की आपत्ति के बीच कानूनी पेंच भी महत्वपूर्ण हो गया है। वहीं ED को लेकर स्थिति अलग है। ED केंद्र के PMLA जैसे केंद्रीय कानूनों के तहत कार्रवाई करती है और उसे किसी राज्य में जांच के लिए ऐसी सामान्य सहमति की आवश्यकता नहीं होती जैसी CBI को होती है।

फिलहाल छात्र CBI जांच की मांग को लेकर विधानसभा मार्च कर रहे हैं और सरकार CID के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब देखना होगा कि इस गतिरोध का समाधान बातचीत से निकलता है या मामला अदालत तक पहुंचता है।

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