टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट, एन. चंद्रशेखरन नहीं लेंगे अगला एक्सटेंशन

Sandesh Wahak Digital Desk: देश के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में शामिल टाटा समूह में एक बार फिर शीर्ष स्तर पर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने पुनर्नियुक्ति न लेने का मन बना लिया है। हालांकि, वह फरवरी 2027 में अपने वर्तमान कार्यकाल के पूरा होने तक चेयरमैन की कमान संभाले रखेंगे।

यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले कुछ समय से टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच उनके कार्यकाल विस्तार को लेकर मतभेदों की चर्चाएं चल रही थीं। उल्लेखनीय है कि टीसीएस, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया जैसी 30 से अधिक बड़ी कंपनियों को नियंत्रित करने वाली टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66% हिस्सेदारी है, जिससे समूह के नीतिगत निर्णयों में उसकी निर्णायक भूमिका होती है।

पद छोड़ने की खबरों के बीच एन. चंद्रशेखरन ने समूह में अपनी चार दशक लंबी यात्रा को याद करते हुए कहा कि टाटा ग्रुप में बिताए गए 40 साल बेहद संतोषजनक रहे हैं और पिछले एक दशक से टाटा संस की अगुवाई करना उनके लिए बेहद सम्मान और जिम्मेदारी भरा अनुभव रहा।

नोएल टाटा से मतभेदों की चर्चा और आने वाली चुनौतियाँ

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच टाटा संस की संभावित लिस्टिंग, गवर्नेंस स्ट्रक्चर और बोर्ड में हिस्सेदारी जैसे अहम मुद्दों पर विचार मेल नहीं खा रहे थे। 1987 में टाटा समूह से जुड़ने वाले चंद्रशेखरन ने 2009 में टीसीएस के सीईओ के रूप में कंपनी को वैश्विक ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जिसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस की कमान सौंपी गई थी।

अपने कार्यकाल में उन्होंने एयर इंडिया के रेगुलेटरी मसलों, जेएलआर पर साइबर हमले और टीसीएस के प्राइजिंग प्रेशर जैसी चुनौतियों का मजबूती से सामना किया। साल 2016 में साइरस मिस्त्री विवाद के बाद अब चंद्रशेखरन के इस फैसले ने एक बार फिर टाटा समूह के भावी नेतृत्व को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

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