छात्र आंदोलनों से जुड़े 129 मुकदमे रद्द, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 5 राज्यों के छात्रों को मिली बड़ी राहत

Sandesh Wahak Digital Desk: देशभर में छात्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान दर्ज हुए मुकदमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और राहत देने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने दिल्ली समेत 5 राज्यों में छात्रों के खिलाफ दर्ज कुल 129 प्राथमिकियों (FIR) को पूरी तरह से खत्म करने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए इन सभी मामलों पर कानूनी कार्रवाई को हमेशा के लिए बंद कर दिया है।

केंद्र सरकार और राज्यों ने अदालत में रखा अपना पक्ष

मंगलवार, 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन सभी मामलों को खत्म करने की मांग की। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को अवगत कराया कि जब आंदोलनों को समाप्त कराने के लिए वार्ता चल रही थी, तब सरकार की तरफ से छात्रों को यह ठोस आश्वासन दिया गया था कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लिए जाएंगे।

केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली से जुड़े मुकदमों की सूची सौंपे जाने के बाद, संबंधित राज्यों बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल ने भी अदालत में अपनी-अपनी याचिकाएं दाखिल कीं। राज्यों के विधिक प्रतिनिधियों ने सर्वोच्च अदालत को औपचारिक रूप से सूचित किया कि वे अपने-अपने राज्यों में दर्ज इन मुकदमों को वापस ले रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, मामले अब इतिहास का हिस्सा

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले का निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया कि इन 129 FIR पर अब आगे किसी भी तरह की जांच या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ दर्ज ये संबंधित मामले अब अतीत और इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। अदालत ने इस दौरान अपने विशेष संवैधानिक अधिकार अनुच्छेद 142 (Article 142) का प्रयोग किया। यह प्रावधान देश की शीर्ष अदालत को किसी भी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष आदेश पारित करने की शक्ति प्रदान करता है।

अन्य राज्यों के लिए भी सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल इन 5 राज्यों के 129 मामलों को खत्म किया, बल्कि देश के अन्य सभी राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश जारी किया। पीठ ने निर्देश दिया कि यदि छात्रों के इन्हीं विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित कोई मामला किसी अन्य राज्य में भी लंबित या दर्ज है, तो उसकी जांच को भी आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए और उस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

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