नोएडा प्रदर्शन केस में HC ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द की, कहा- ‘UP सरकार के दावे मनगढ़ंत’
Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए कामगारों के विरोध प्रदर्शन (Noida Workers Protest) से जुड़े मामले में 25 वर्षीय आकृति चौधरी (Akriti Chaudhary) को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 (NSA) के तहत उनकी हिरासत को रद्द करते हुए आदेश दिया कि अगर वह किसी दूसरे मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।
दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक आकृति करीब पांच महीने से हिरासत में थीं। उन्होंने अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) दाखिल की थी।
गिरफ्तारी और नोटिस को लेकर कोर्ट ने उठाए सवाल
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने रिकॉर्ड में कई प्रक्रियागत खामियां पाईं और कहा कि आकृति को “मनगढ़ंत कहानी” के आधार पर हिरासत में रखा गया।
सरकार की ओर से बताया गया कि Akriti Chaudhary को 12 अप्रैल 2026 को सुबह 10:56 बजे गिरफ्तार किया गया था और उन्हें कानून के मुताबिक नोटिस दिया गया था। हालांकि, जनरल डायरी की एंट्री की जांच के बाद Allahabad Highcourt ने इस दावे पर सवाल उठाया। कोर्ट के मुताबिक रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि नोटिस तैयार होने से पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी थी।
पथराव और आगजनी वाले वीडियो पर भी मांगा सबूत
सरकार का दावा था कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को पथराव और आगजनी के लिए उकसाया था। इस पर कोर्ट ने वह वीडियो फुटेज पेश करने को कहा, जिससे इस आरोप की पुष्टि हो सके।
अदालत ने पूछा कि रिकॉर्ड में आखिर कहां दर्ज है कि आकृति ने लोगों को बुलाकर पथराव करने या वाहनों में आग लगाने के लिए कहा था। सरकार ने वीडियो पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए और मोहलत देने से इनकार कर दिया कि वह पहले ही करीब पांच महीने हिरासत में रह चुकी हैं।
कोर्ट ने हिरासत रद्द करने के साथ ही याचिकाकर्ता को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। फैसले के बाद Akriti Chaudhary की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला NSA के इस्तेमाल और गिरफ्तारी की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने को लेकर भी अहम माना जा रहा है।

