पति के कर्ज के लिए SBI ने पत्नी की FD से काटे 19.90 लाख, हाईकोर्ट ने दिया 1 लाख मुआवजे का आदेश
Allahabad High Court: पति का बैंक लोन चुकाने के लिए पत्नी की सावधि जमा (FD) से करीब 20 लाख रुपये निकालना भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को भारी पड़ गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बैंक की इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे “घृणित” और “बैंकिंग प्रथाओं के लिए स्पष्ट रूप से अभिशाप” बताया है।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने लखनऊ निवासी नेहा मिश्रा की याचिका स्वीकार करते हुए SBI को उनकी FD से निकाले गए ₹19,90,693 वापस करने का आदेश दिया है। बैंक को यह रकम चार सप्ताह के भीतर उसी ब्याज दर के साथ लौटानी होगी, जिस दर पर महिला की FD चल रही थी। इसके अलावा अदालत ने ₹1 लाख का दंडात्मक मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
न पत्नी गारंटर थीं, न सह-ऋणकर्ता
अदालत ने कहा कि SBI ने नेहा मिश्रा के खाते से उनके दिवंगत पति के लोन की वसूली करने का कोई कानूनी आधार नहीं बताया। खास बात यह थी कि महिला का बैंक के साथ इस लोन को लेकर कोई संविदात्मक संबंध नहीं था।
मिश्रा के पति, जो लखनऊ के एक अस्पताल में सहायक प्रोफेसर थे, ने 3 नवंबर 2020 को SBI से ₹15 लाख का लोन लिया था। अदालत के आदेश के मुताबिक नेहा मिश्रा न तो लोन की हस्ताक्षरकर्ता थीं और न सह-आवेदक, सह-ऋणकर्ता, गारंटर, जमानतदार, क्षतिपूर्तिकर्ता या नामित व्यक्ति।
पति की मौत के बाद FD से काट लिए 19.90 लाख
यह लोन SBI General Insurance के बीमा कवर से सुरक्षित था। इसके लिए मृतक ने कथित तौर पर ₹8,803 का प्रीमियम भी दिया था। 6 मई 2021 को कोविड-19 से उनकी मृत्यु हो गई।
इसके बाद SBI ने नेहा मिश्रा से लोन की बकाया राशि मांगी और 23 सितंबर 2025 को कानूनी नोटिस भेजकर ब्याज समेत ₹13,87,382 की मांग की। दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल ही रही थी कि बैंक ने नेहा के नाम की FD भुना ली और उनके खाते से ₹19,90,693 निकाल लिए।
मामले में SBI ने ग्रेच्युटी और सेवानिवृत्ति लाभों से लोन की वसूली से जुड़े कुछ फैसलों का हवाला दिया, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे इस मामले में लागू नहीं माना। अदालत के आदेश के बाद अब SBI को पूरी रकम ब्याज समेत लौटाने के साथ ₹1 लाख मुआवजा भी देना होगा।
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