‘ऑफिस-ऑफिस’ सीरियल की तरह न भटके आम आदमी, CM योगी ने अफसरों को दी नसीहत

CM Yogi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कामकाज में सुधार लाने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि आज भी किसी बुजुर्ग को पेंशन के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। आम नागरिक की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता। ऐसा नहीं होना चाहिए कि कोई व्यक्ति ‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक की तरह एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटकता रहे।

योगी शुक्रवार को लखनऊ के लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के तहत आयोजित ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी सामान्य काम के लिए नागरिक का अलग-अलग कार्यालयों में भटकना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करता है। समस्याओं को जानबूझकर लटकाना या जानकारी की कमी के कारण उनका समाधान नहीं कर पाना, दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं। नागरिकों की संतुष्टि ही किसी भी लोकसेवक के काम का रिपोर्ट कार्ड है।

अयोग्य और लापरवाह कर्मचारियों पर भी जताई चिंता

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी अयोग्य व्यक्ति का जिम्मेदार पद पर बैठना खतरनाक है। इसी तरह, लापरवाह व्यक्ति का उस पद पर बने रहना भी ठीक नहीं है। कई कर्मचारी अपने अधिकारों और पदोन्नति को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन अपने दायित्वों के प्रति उतनी गंभीरता नहीं दिखाते। इसलिए कर्मचारियों की क्षमता लगातार बढ़ाने, उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट करने और उनके काम का सही मूल्यांकन करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायत करने वाले लोगों से अलग, सामान्य नागरिक की वास्तविक समस्या का समाधान प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी बुजुर्ग, युवा, महिला, किसान या जरूरतमंद को निराश लौटना पड़े और उसे तय समय में समाधान न मिले, तो लोक सेवा का उद्देश्य पूरा नहीं होता।

योगी ने ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही भूमिका के लिए सही व्यक्ति की अवधारणा को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) के साथ मिलकर अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों, कार्य प्रदर्शन और उनकी अच्छी कार्य-कहानियों को वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम किया जाए। इससे कर्मचारियों की योग्यता के अनुसार जिम्मेदारी तय करने और सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने में मदद मिलेगी।

AI और डिजिटल तकनीक के अनुरूप तैयार हों लोकसेवक

मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से उत्तर प्रदेश में क्षमता विकास के लिए उपाम को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने में सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक तेजी से शासन का स्वरूप बदल रहे हैं। ऐसे में लोकसेवकों को इन बदलावों के अनुरूप सक्षम बनाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि तकनीक शासन की रफ्तार बढ़ा सकती है, प्रक्रियाओं को आसान बना सकती है और फैसलों को बेहतर बना सकती है। लेकिन प्रशासन को संवेदनशील उसका सेवा भाव ही बनाएगा।

योगी ने ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्थानीय निकायों को मजबूत, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाना होगा। पंचायतें और नगर निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। इनके कामकाज में सुधार होगा, तभी सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।

19.26 लाख से अधिक कर्मचारी पोर्टल पर पंजीकृत

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी लोक सेवा की कार्यसंस्कृति बदलने का राष्ट्रीय अभियान है। उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। अब तक इस पोर्टल के माध्यम से लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं।

हालांकि, योगी ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण की सफलता केवल इन आंकड़ों से नहीं मापी जानी चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों के फैसले कितने बेहतर हुए, प्रक्रियाएं कितनी आसान हुईं और आम नागरिक को कितनी अच्छी सेवा मिली।

गोरखपुर की सड़क का उदाहरण देकर समझाई व्यावहारिक समझ की जरूरत

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने एक सड़क को दो लेन से चार लेन करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभियंताओं ने सड़क को जमीन से करीब तीन मीटर ऊंचा उठा दिया। इससे आसपास घनी आबादी में रहने वाले लोगों का आवागमन बाधित हो गया।

शिकायत मिलने पर वह खुद मौके पर पहुंचे और सड़क को उसके मूल उद्देश्य के अनुसार बनाने के निर्देश दिए। योगी ने कहा कि यह केवल सड़क निर्माण का मामला नहीं था, बल्कि काम की व्यावहारिक समझ और नागरिकों की जरूरतों को समझने की क्षमता का सवाल था।

उन्होंने कहा कि केवल डिग्री और नियुक्ति पत्र हासिल कर लेने से कोई व्यक्ति योग्य अभियंता या सक्षम अधिकारी नहीं बन जाता। नई तकनीक अपनाना, परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना और अपनी जिम्मेदारियों को समझना भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी सोच के साथ क्षमता विकास की जरूरत महसूस हुई। क्षमता विकास आयोग की स्थापना और एस. राधा चौहान के अध्यक्ष बनने के बाद इस विषय पर उनकी बातचीत हुई थी। उपाम को आधुनिक तकनीक और क्षमता विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास भी इसी दिशा में किया जा रहा है।

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