CEC ‘वोट चोरी’ में जुटे हैं तो BJP राम मंदिर के चंदे-चढ़ावे में, अराधना मिश्रा का बड़ा हमला
Aradhana Mishra Mona: लखनऊ में कांग्रेस की उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल की नेता अराधना मिश्रा ‘मोना’ ने शनिवार को प्रेसवार्ता कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। मोना ने आरोप लगाया कि आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया।
हाल में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार अलग-अलग फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
SIR और वोटर लिस्ट पर सवाल
मोना ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह होनी चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग ने रिपोर्ट के बाद कहा कि SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए।
मोना ने कहा कि राहुल गांधी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद भी मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने इन मुद्दों पर कांग्रेस के आंदोलन को आगे जारी रखने की बात कही।
CEC नियुक्ति पर भी निशाना
मोना ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। 2023 के कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के 2023 के अनूप बरनवाल फैसले में संसद द्वारा कानून बनने तक चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI को शामिल करने की व्यवस्था बताई गई थी।

