आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का एक्शन, 426 करोड़ की संपत्ति अटैच
Azam Khan Johar University: समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। ईडी के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि उनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये आंका गया है।
ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस ने 28 अक्टूबर को इस कार्रवाई को लेकर प्रेसनोट जारी किया। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत संपत्ति अटैच की है। जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर के जौहर नगर में स्थित है और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम पर है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खां ने की थी। ईडी के अनुसार, ट्रस्ट पर उनका नियंत्रण है और वह यूनिवर्सिटी के मानद कुलाधिपति भी हैं।
किसानों की जमीन और सरकारी धन के इस्तेमाल से शुरू हुई जांच
ईडी ने रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इन मामलों में आरोप था कि यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन कब्जाई गई। जांच में सिंहनखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ क्षेत्र में फैले शत्रु संपत्ति के 45 भूखंडों पर भी अवैध कब्जे की बात सामने आई। एजेंसी के मुताबिक, संबंधित जमीन की लीज ट्रस्ट के पक्ष में रद्द होने के बाद जिला प्रशासन के जरिए शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने उसका कब्जा वापस ले लिया।
जांच के दौरान सरकारी विकास कार्यों के लिए जारी धन का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी परिसर में किए जाने के आरोप भी सामने आए। ईडी के अनुसार, सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों से धन ट्रस्ट को दान के रूप में वापस पहुंचाए जाने की बात भी जांच में सामने आई।
ईडी ने इस जानकारी को PMLA की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा किया था। इसके आधार पर 13 अक्टूबर को अजीमनगर थाने में आजम खां, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गईं।
186 करोड़ के सरकारी ठेकों और 40 लाख के दान की जांच
ईडी के प्रेसनोट के मुताबिक, एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के करीब 186 करोड़ रुपये के ठेकों की राशि में से 30 से 40 प्रतिशत का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में किया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, एक अन्य फर्म के साझेदारों ने आजम खां के प्रभाव में काम करने और ट्रस्ट को 40 लाख रुपये दान देने की बात स्वीकार की। ईडी ने यह भी बताया कि आयकर विभाग ने ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया है।
जांच में विधायक-सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से यूनिवर्सिटी परिसर में 6.60 करोड़ रुपये के काम कराए जाने की जानकारी भी सामने आई। ये काम उत्तर प्रदेश जल निगम ने कराए थे। उस समय आजम खां जल निगम के अध्यक्ष थे। इसके अलावा, मेरठ की दो शैक्षणिक संस्थाओं से ट्रस्ट को 6.24 करोड़ रुपये का दान मिलने की बात भी जांच में सामने आई।
23.41 करोड़ की सरकारी मंजूरी और पंडाल के मालिकाना हक पर सवाल
ईडी के मुताबिक, राज्य सरकार ने यूनिवर्सिटी परिसर में पंडाल, ओबीसी बालक छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक बनाने के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। पंडाल के निर्माण के लिए वर्ष 2015 में 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इसके साथ शर्त थी कि पंडाल का मालिकाना हक संस्कृति विभाग के पास रहेगा और इसे सरकारी इस्तेमाल के लिए मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा।
ईडी का आरोप है कि वर्ष 2016 में आदेश बदलकर पंडाल का मालिकाना हक यूनिवर्सिटी को दे दिया गया। इसके साथ ही सरकारी इस्तेमाल के लिए मुफ्त उपलब्ध कराने की शर्त भी हटा दी गई।
499 करोड़ की लागत में से 426 करोड़ का स्रोत नहीं बता सका ट्रस्ट
ईडी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जिला मूल्यांकन अधिकारी ने यूनिवर्सिटी परिसर की 59 इमारतों के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी थी। वहीं, 114 बिक्री विलेखों के जरिए खरीदी गई जमीन का मूल्य 4.63 करोड़ रुपये बताया गया। इस तरह परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई।
दूसरी ओर, ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया था। ईडी के मुताबिक, इसमें से 12.29 करोड़ रुपये का दान गैर-वास्तविक पाया गया। जांच एजेंसी ने निर्माण और जमीन खरीद पर वैध स्रोतों से हुआ खर्च 72.63 करोड़ रुपये माना।
ईडी का कहना है कि बाकी 426.46 करोड़ रुपये के स्रोत के बारे में ट्रस्ट के पदाधिकारी संतोषजनक हिसाब नहीं दे सके। एजेंसी ने इस रकम को अपराध से अर्जित आय मानते हुए संबंधित जमीन और इमारतों को अटैच किया है।
ईडी ने बताया कि इससे पहले 19 अगस्त 2026 को जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी ली गई थी। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और आपत्तिजनक माने गए दस्तावेज जब्त किए गए। एजेंसी के मुताबिक, मामले में आगे की जांच जारी है।

