मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य और भाजपा नेता डॉ. सतीश शर्मा 3 लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार

Meerut News: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ जारी महाअभियान के तहत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो के बाद अब सीबीआई ने भी यूपी के भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में सीबीआई की टीम ने मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को तीन लाख रुपये की मोटी घूस लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

ठेकेदार से मांगी थी घूस, सीबीआई ने ऐसे दबोचा

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला कैंट बोर्ड के अंतर्गत होने वाले विकास कार्यों के टेंडर और भुगतान से जुड़ा हुआ है। कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश चंद्र शर्मा ने एक सरकारी कार्य को पास कराने और उसके एवज में एक ठेकेदार से तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

ठेकेदार ने इस बात की लिखित शिकायत सीधे सीबीआई के आला अधिकारियों से कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने त्वरित रणनीति बनाई और कड़ा जाल बिछाया। योजना के मुताबिक, जैसे ही ठेकेदार ने रिश्वत की रकम (3 लाख रुपये) भाजपा नेता डॉ. सतीश शर्मा को सौंपी, वैसे ही सादे कपड़ों में मुस्तैद सीबीआई की टीम ने उन्हें मौके पर ही रंगेहाथ दबोच लिया।

गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की टीम डॉ. सतीश शर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए गुप्त स्थान पर ले गई। इसके साथ ही जांच का दायरा बढ़ाते हुए टीम ने मेरठ के पल्लवपुरम स्थित अंसल टाउन में उनके मुख्य आवास और अन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। सूत्रों के मुताबिक, देर रात तक चली इस छापेमारी में टीम ने घर के कोने-कोने को खंगाला और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों व बैंक खातों से जुड़े कागजातों को अपने कब्जे में ले लिया है। फिलहाल मामले से जुड़े अन्य लोगों की संलिप्तता की भी गहनता से जांच की जा रही है।

फरवरी 2022 से कैंट बोर्ड में मनोनीत थे डॉ. सतीश शर्मा

आरोपी डॉ. सतीश चंद्र शर्मा भाजपा के बेहद वरिष्ठ और रसूखदार नेता माने जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी होने के नाते ही केंद्र सरकार द्वारा उन्हें फरवरी-2022 में मेरठ कैंट बोर्ड का सदस्य नामित (मनोनीत) किया गया था। तब से लेकर अब तक उन्हें हर छह महीने पर लगातार सेवा अवधि का विस्तार (एक्सटेंशन) दिया जा रहा था। ऐसे में सत्तापक्ष के इतने बड़े चेहरे पर सीबीआई की इस सीधी और सख्त कार्रवाई को यूपी में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बेहद कड़ा और निर्णायक संदेश माना जा रही है।

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