बंद पड़ी फैक्ट्रियों के अलॉटमेंट रद्द कर नए उद्यमियों को सौंपे औद्योगिक प्लॉट: भूपेंद्र चौधरी

Bareilly News: उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने शनिवार को बरेली के सर्किट हाउस में उद्योग विभाग के मंडल स्तरीय अधिकारियों के साथ एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक की। बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बरेली मंडल (बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं और पीलीभीत) के औद्योगिक और मिनी औद्योगिक आस्थानों का तत्काल सर्वे कराया जाए।

उन्होंने साफ कहा कि जो औद्योगिक इकाइयां लंबे समय से बंद पड़ी हैं और उनके दोबारा शुरू होने की कोई गुंजाइश नहीं है, उन्हें फौरन नोटिस जारी कर उनका आवंटन (अलॉटमेंट) रद्द किया जाए। इसके बाद ये प्लॉट उन नए और ऊर्जावान उद्यमियों को दिए जाएं जो वास्तव में यहाँ अपनी इंडस्ट्री लगाकर रोजगार सृजन करना चाहते हैं।

बैठक का संचालन संयुक्त आयुक्त उद्योग (बरेली मंडल) श्रीनाथ पासवान ने किया। इसमें चारों जिलों के उपायुक्त उद्योग- विकास यादव (बरेली), संजय सिंह (शाहजहांपुर), सचिन जैन (बदायूं) और आशीष गुप्ता (पीलीभीत) मुख्य रूप से मौजूद रहे। मंत्री ने विभाग की महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी की प्रगति रिपोर्ट की सघन समीक्षा की।

लोन के लिए लगेंगे विशेष शिविर

रोजगार और स्वरोजगार की योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने के लिए एमएसएमई मंत्री ने कई कड़े और व्यावहारिक दिशा-निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और ओडीओपी वित्त पोषण योजना के तहत युवाओं को लोन दिलाने के लिए जिलों के लीड बैंक मैनेजर और सभी बैंकों के जिला समन्वयकों के साथ मिलकर विशेष ऋण शिविर लगाए जाएं। इन कैंपों में बैंकों के बड़े अधिकारियों के साथ स्थानीय सांसद और विधायकों को भी आमंत्रित किया जाए।

टूलकिट वितरण में बड़ा बदलाव: विश्वकर्मा श्रम सम्मान और ओडीओपी प्रशिक्षण योजना के तहत दिए जाने वाले टूलकिट का वितरण किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि बकायदा सार्वजनिक समारोह आयोजित कर जनप्रतिनिधियों के हाथों कराया जाएगा। इसके अलावा, टूलकिट के बैग्स पर अनिवार्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लगाई जाएंगी। टूलकिट की खरीद में पूरी पारदर्शिता और सैंपल टेस्टिंग के कड़े मानक तय करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि योजनाओं का ब्रोशर तैयार कर आम जनता और जनप्रतिनिधियों को बांटा जाए और स्थानीय स्तर पर रेडियो, टीवी और अखबारों के माध्यम से इसका सघन प्रचार हो। साथ ही, अधिकारी खुद लाभार्थियों को फोन लगाकर उनका फीडबैक लें कि उन्हें योजना का लाभ मिलने में कोई परेशानी तो नहीं हुई।

रिपोर्ट: रंजीत बिसारिया

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