मुजफ्फरनगर दंगा 2013: संजीव बालियान, कपिल देव अग्रवाल और सुरेश राणा समेत 25 नेताओं पर दर्ज केस वापस
Muzaffarnagar News: वर्ष 2013 के बहुचर्चित मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान और पूर्व राज्य मंत्री सुरेश राणा सहित 25 भाजपा नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं को अदालत से बड़ी राहत मिली है। स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा मुकदमा वापस लेने से जुड़ी याचिका को औपचारिक रूप से स्वीकार करते हुए केस खत्म करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
उत्तर प्रदेश शासन की सिफारिश पर अभियोजन अधिकारी ने दाखिल किया था आवेदन
मामले की जानकारी देते हुए अभियोजन अधिकारी राहुल सिंह ने बताया कि स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी देवेंद्र कुमार फौजदार ने राज्य सरकार के निर्णय के आधार पर दाखिल अर्जी को मंजूरी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जनहित और प्रासंगिकता को देखते हुए केस वापस लेने की संस्तुति की गई थी, जिसके बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह औपचारिक प्रार्थना पत्र जमा किया था।
महापंचायत में भड़काऊ भाषण और निषेधाज्ञा उल्लंघन का था आरोप
यह पूरा मामला 31 जुलाई, 2013 को मुजफ्फरनगर के नगला मंदौड़ में आयोजित हुई विशाल महापंचायत से जुड़ा हुआ है। नामजद आरोपियों पर प्रशासन द्वारा लागू निषेधाज्ञा (धारा 144) का उल्लंघन करने, सरकारी अधिकारियों के काम में अड़चन डालने और मंच से दिए गए भाषणों के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने तथा तनाव फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
केस से बरी होने वालों में कई प्रमुख राजनीतिक चेहरे शामिल
अभियोजन अधिकारी के अनुसार, जिन 25 लोगों पर से यह केस हटाया गया है, उनमें वर्तमान राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, अशोक कटारिया के अलावा पूर्व सांसद भारतेंदु सिंह और सोहनवीर सिंह शामिल हैं। इसके साथ ही पूर्व विधायक अशोक कंसल व उमेश मलिक, विश्व हिंदू परिषद की वरिष्ठ नेता साध्वी प्राची तथा डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद को भी अदालत के इस फैसले से राहत मिली है।
सबूतों के अभाव में अन्य मामलों में भी बरी हुए आरोपी
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में भड़के भीषण सांप्रदायिक दंगों में 60 से अधिक नागरिकों की जान चली गई थी, जबकि 40 हजार से भी अधिक लोग विस्थापित हो गए थे। इसी बीच, दंगों के दौरान हुई हत्या, लूटपाट और आगजनी से जुड़े एक अन्य मामले में भी मुजफ्फरनगर की स्थानीय अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य और सबूत न होने के आधार पर 22 अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।
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