बरेली BJP के पिछड़ा वर्ग सम्मेलन में खाली कुर्सियां, अखिलेश-कांग्रेस ने कसा तंज, उठाए सवाल
Bareilly BJP Conference: बरेली में भाजपा के पिछड़ा वर्ग महासम्मेलन में खाली पड़ी कुर्सियों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। 24 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में तय समय पर बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली नजर आईं। कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भाजपा पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने भी सम्मेलन में कम भीड़ को लेकर सवाल उठाए।
डेढ़ घंटे इंतजार के बाद शुरू हुआ सम्मेलन
पिछड़ा वर्ग समाज कल्याण समिति की ओर से आयोजित सम्मेलन शाम 5 बजे शुरू होना था। हालांकि, करीब डेढ़ घंटे तक लोगों के पहुंचने का इंतजार किया गया और लगभग 6:30 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ। सभागार के अंदर और बाहर कुर्सियां लगाई गई थीं, लेकिन शुरुआत में कई सीटें खाली दिखाई दीं। मंच पर भाजपा सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार (Chhatrapal Singh Gangwar), यूपी सहकारी ग्राम विकास बैंक के उपसभापति रविंद्र सिंह राठौर और सम्मेलन संयोजक वीरेंद्र कुमार अटल मौजूद थे।
Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया पोस्ट में खाली कुर्सियों की तस्वीरों का जिक्र करते हुए भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने दावा किया कि मंच पर भाजपा सांसद और स्थानीय नेता जनता के आने का इंतजार करते रहे। अपने पोस्ट में उन्होंने महाराष्ट्र से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों और भाजपा के कथित ‘पाप के पैसे’ का भी जिक्र किया। ये अखिलेश यादव के राजनीतिक आरोप हैं।
सांसद बोले, आयोजन हमारी तरफ से नहीं था
भाजपा सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार ने खाली कुर्सियों को लेकर कहा कि सम्मेलन का आयोजन उनकी ओर से नहीं किया गया था। उन्हें आयोजकों की तरफ से कार्यक्रम में बुलाया गया था और भीड़ व व्यवस्था की जिम्मेदारी भी आयोजकों की थी।
उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग समाज को संगठित और मजबूत करने के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रम किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर लोगों की समस्याओं को भी पिछड़ेपन की चर्चा में शामिल करने की बात कही।
सपा-कांग्रेस ने उठाए सवाल
Akhilesh Yadav के बयान के बाद बरेली के सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव ने भाजपा सरकार पर पिछड़े समाज के अधिकारों, आरक्षण और संवैधानिक व्यवस्थाओं को लेकर आरोप लगाए। कांग्रेस जिला प्रवक्ता पंडित राज शर्मा ने भी सम्मेलन में कम भीड़ को लेकर भाजपा के जनसमर्थन पर सवाल उठाया और रोजगार, किसान, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे मुद्दों का हवाला दिया। दोनों नेताओं की टिप्पणियां राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर भाजपा की ओर से इस मामले में अलग प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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