AI वाली ‘दुल्हन’ बनकर करोड़ों की ठगी! कानपुर में फर्जी मैट्रीमोनियल कॉल सेंटर का भंडाफोड़
Kanpur Matrimonial Scam: कानपुर पुलिस ने मैट्रीमोनियल वेबसाइट के नाम पर चल रहे एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कल्याणपुर थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ, जहां AI से तैयार की गई खूबसूरत लड़कियों की तस्वीरें दिखाकर शादी का झांसा दिया जाता था और देशभर के लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की जाती थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह करीब 15 हजार लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने नकली मैट्रीमोनियल प्लेटफॉर्म तैयार कर रखा था। वेबसाइट पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई गई आकर्षक युवतियों की तस्वीरें अपलोड की जाती थीं। शादी की तलाश कर रहे लोगों से संपर्क कर उन्हें इन फर्जी प्रोफाइल से जोड़ा जाता था।
इसके बाद कॉल सेंटर में बैठी युवतियां खुद को संभावित दुल्हन बताकर बातचीत शुरू करती थीं। लगातार भावनात्मक बातचीत कर पहले भरोसा जीतती थीं और फिर रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल एक्टिवेशन, प्रीमियम सर्विस और मुलाकात कराने के नाम पर पैसे ऐंठ लेती थीं।
पुलिस के छापे में खुला पूरा खेल
पुलिस को सूचना मिली थी कि कल्याणपुर के आवास विकास क्षेत्र में संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके बाद साइबर सेल और कल्याणपुर पुलिस ने संयुक्त छापेमारी कर अपार्टमेंट में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया।
डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि मौके पर ‘ऑनलाइन मैच पॉइंट’ नाम से कॉल सेंटर संचालित मिल रहा था, जहां से देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को कॉल की जाती थी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी अनुराधा त्रिवेदी, विक्रम खूटे और प्रियंका को गिरफ्तार किया। वहीं कॉल सेंटर में काम कर रही करीब 15 युवतियों से भी पूछताछ की गई।
हर दिन 100 से 150 लोगों को करते थे कॉल
जांच में पता चला कि कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों को रोजाना 100 से 150 शादी के इच्छुक लोगों के मोबाइल नंबर दिए जाते थे। बातचीत के दौरान उनकी उम्र, पसंद और निजी जानकारी जुटाई जाती थी। इसके बाद उनकी पसंद के मुताबिक AI से तैयार लड़कियों की तस्वीरें भेजकर उन्हें रिश्ते का भरोसा दिलाया जाता था।
जब सामने वाला व्यक्ति पूरी तरह विश्वास कर लेता था, तब उससे अलग-अलग बहानों से पैसे वसूले जाते थे।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह करीब डेढ़ साल से सक्रिय था। शुरुआती जांच में पता चला है कि 10 से 15 हजार से अधिक लोग इस नेटवर्क का शिकार बने हैं। आशंका है कि ठगी की कुल रकम करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।
बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस अब उनके बैंक खातों, मोबाइल डेटा और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने कुल कितनी रकम की ठगी की और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। वहीं पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
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