‘गटर जेनरेशन’ टिप्पणी पर कंगना रनौत को राहत, कोर्ट ने खारिज की रिवीजन याचिका
Kangana Ranaut: पेपर लीक के खिलाफ छात्र आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों पर टिप्पणी करने के मामले में भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत को राहत मिली है। सत्र न्यायालय ने उनके खिलाफ दायर रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया है। जिला जज संजय कुमार मलिक ने रिवीजन को सुनवाई योग्य नहीं माना और शुरुआती स्तर पर ही निरस्त करने का आदेश दिया।
अधिवक्ता ने कंगना के खिलाफ दाखिल किया था परिवाद
न्यू लॉयर्स कॉलोनी निवासी अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने अदालत में परिवाद दाखिल किया था। उनका आरोप था कि नीट समेत कई परीक्षाओं के पेपर बार-बार लीक होने से देशभर के छात्र नाराज थे। इसके विरोध में छात्रों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया था।
परिवाद के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसके बाद सांसद कंगना रनौत ने 27 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर आंदोलनकारी छात्रों के लिए अमर्यादित टिप्पणी की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ‘गटर जेनरेशन’ तक कह दिया था।
रमाशंकर शर्मा ने इस मामले में कंगना रनौत को अदालत में तलब करने की मांग की थी। हालांकि, अधीनस्थ अदालत ने 3 सितंबर 2026 को परिवाद खारिज कर दिया। इस आदेश के खिलाफ अधिवक्ता ने सत्र न्यायालय में रिवीजन दाखिल किया था।
अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे में आ सकती है कठोर टिप्पणी
जिला जज संजय कुमार मलिक ने रिवीजनकर्ता और जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) राधाकृष्ण गुप्ता की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) तथा 19(2) का हवाला दिया।
अदालत ने कहा कि किसी सार्वजनिक विषय पर की गई कठोर, विवादास्पद या अमर्यादित टिप्पणी नागरिक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आ सकती है। ऐसी टिप्पणी से राजनीतिक या सामाजिक असहमति पैदा हो सकती है, लेकिन केवल इसी आधार पर उसे आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में परिवादी कथित घटना का न तो पीड़ित है और न ही व्यथित व्यक्ति। इसलिए उसके द्वारा दाखिल परिवाद कानूनी अधिकार के अभाव से प्रभावित है।
बेटे के नाबालिग होने का भी किया गया जिक्र
अदालत ने आदेश में कहा कि रिवीजनकर्ता ने अपने बेटे के हाईस्कूल के शैक्षिक प्रमाण पत्र की प्रति दाखिल की थी। इस प्रमाण पत्र के अनुसार, कंगना रनौत की कथित टिप्पणी के समय उनका बेटा नाबालिग था।
अदालत के मुताबिक, ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि उनका बेटा नीट परीक्षा में शामिल हुआ था या कंगना की टिप्पणी से उसकी भावनाओं को ठेस पहुंची थी। इन्हीं आधारों पर सत्र न्यायालय ने रिवीजन को पोषणीय नहीं मानते हुए अंगीकरण के स्तर पर ही खारिज कर दिया।
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