भारी हंगामे के बीच लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, पीएम मोदी और अमित शाह रहे मौजूद
Sandesh Wahak Digital Desk: संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी तीखी राजनीतिक रस्साकशी के कारण पूरा सत्र हंगामे की बलि चढ़ गया। आमतौर पर सत्र समापन पर लोकसभा अध्यक्ष सदन की उत्पादकता और पारित कामकाज का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हैं, लेकिन इस बार सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ने सदस्यों को ‘वंदे मातरम्’ के लिए खड़े होने को कहा। राष्ट्रगीत के तुरंत बाद सत्र की समाप्ति की घोषणा कर दी गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई प्रमुख दलों के शीर्ष नेता उपस्थित थे।
जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर विवाद पर आक्रामक रहा विपक्ष
20 जुलाई से शुरू हुआ यह सत्र अपने निर्धारित समय यानी 13 अगस्त तक ही चला, लेकिन बिना किसी सार्थक बहस के समाप्त हो गया। शुरुआती दिन से ही विपक्षी दलों ने दो बड़े मुद्दों को लेकर सरकार की घेराबंदी की। पहला विषय दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के छात्र प्रदर्शन पर पुलिस की लाठीचार्ज और कथित पेलेट गन की कार्रवाई का था, जिस पर विपक्ष गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा। दूसरा विषय अयोध्या स्थित राम मंदिर में सामने आए चढ़ावे की कथित चोरी का था, जिस पर विपक्षी दल सरकार से स्पष्टीकरण मांगते रहे।
महज 16 फीसदी ही हो सका काम, प्रश्नकाल और शून्यकाल रहे ठप
सदन में जारी निरंतर व्यवधान की वजह से विधायी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। प्रश्नकाल और शून्यकाल जैसे जनहित से जुड़े दौर अधिकांश दिनों में हंगामे की भेंट चढ़ गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे सत्र के दौरान लोकसभा में महज 16 प्रतिशत ही काम हो सका, जबकि राज्यसभा में उत्पादकता करीब 31 प्रतिशत दर्ज की गई। संसदीय चर्चा के बहुमूल्य घंटों का नुकसान हुआ।
परिसीमन व एफसीआरए बिल अटका
विपक्ष के भारी विरोध और नारेबाजी के बीच भी सरकार ने अपने संख्या बल के आधार पर कई महत्वपूर्ण कानूनी विधेयकों को पारित करा लिया। इनमें एंटी-पेपर लीक बिल, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से संबंधित कानून, टैक्सेशन संशोधन बिल, एमएसएमई संशोधन बिल और ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल शामिल हैं। इनमें से अधिकांश विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के ध्वनिमत से मंजूर हुए। हालांकि, एफसीआरए (FCRA) संशोधन और परिसीमन से जुड़े कई अन्य अहम मसौदे पारित नहीं हो सके और लंबित रह गए।
संसदीय गतिरोध को दूर करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने एक दिन पहले सभी मुद्दों पर चर्चा की पेशकश भी की थी, लेकिन बात नहीं बन सकी। सरकार का कहना था कि वह बहस के लिए तैयार है परंतु विपक्ष जानबूझकर कार्यवाही में बाधा डाल रहा है, वहीं विपक्ष ने सरकार पर जवाबदेही से भागने का आरोप लगाया। यह सत्र हाल के वर्षों के सबसे ज्यादा प्रभावित सत्रों में गिना जाएगा, जहां विधायी काम तो संपन्न हुए, लेकिन नीतिगत चर्चा और संसदीय जवाबदेही का माहौल पूरी तरह गायब रहा।
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