Lucknow News: हाई-रिस्क मरीज की जटिल सर्जरी सफल, SGPGI में 42 वर्षीय महिला को मिली नई जिंदगी
Lucknow News: गंभीर हृदय और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रही 42 वर्षीय महिला की SGPGI (लखनऊ) के एडवांस्ड ट्रॉमा सेंटर में सफल सर्जरी की गई।
जांघ की हड्डी टूटने के बाद कई अस्पतालों ने ऑपरेशन के अत्यधिक जोखिम को देखते हुए सर्जरी से इनकार कर दिया था।
हादसे के करीब 20 दिन बाद मरीज को SGPGI रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने जटिल केस को संभाला।
एडवांस्ड ट्रॉमा सेंटर में भर्ती के समय मरीज को हाई-रिस्क श्रेणी में रखा गया। चिकित्सकीय आकलन के अनुसार ऑपरेशन के दौरान मृत्यु का जोखिम करीब 20 प्रतिशत था।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए ऑर्थोपेडिक्स, एनेस्थीसिया, कार्डियोलॉजी और पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से इलाज की रणनीति तैयार की।
माइक्रो-कैथेटर से नियंत्रित मात्रा में दी एनेस्थीसिया
सर्जरी से पहले मरीज को चिकित्सकीय रूप से ऑप्टिमाइज किया गया, ताकि हृदय और फेफड़ों पर ऑपरेशन के दौरान अतिरिक्त दबाव कम किया जा सके।
हाई-रिस्क को देखते हुए एनेस्थीसिया टीम ने अल्ट्रासाउंड गाइडेड कंटीन्यूअस स्पाइनल एनेस्थीसिया तकनीक का इस्तेमाल किया।
इसमें माइक्रो-कैथेटर के जरिए नियंत्रित मात्रा में एनेस्थीसिया की दवा दी गई। इससे ऑपरेशन के दौरान हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर में बड़े उतार-चढ़ाव से बचने में मदद मिली।
मिनिमली इनवेसिव तकनीक से किया फ्रैक्चर का ऑपरेशन
ऑर्थोपेडिक टीम ने जांघ के फ्रैक्चर की मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की। छोटे चीरे लगाकर रक्तस्राव को न्यूनतम रखा गया।
ऑपरेशन थिएटर और पोस्ट-ऑपरेटिव आईसीयू में एडवांस मॉनिटरिंग के जरिए मरीज की लगातार निगरानी की गई।
सर्जरी के दूसरे दिन से मरीज को चलने की अनुमति दी गई और फिजियोथेरेपी शुरू कर दी गई। छह दिन के उपचार और निगरानी के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
चार विभागों की टीम ने संभाला जटिल केस
सर्जरी टीम में ऑर्थोपेडिक्स विभाग से डॉ. पुलक शर्मा, डॉ. फुरकान-उल-हक, डॉ. अवनीश मिश्रा और डॉ. विकास जायसवाल, एनेस्थीसिया से डॉ. वंश प्रिया, डॉ. दीक्षा रानी और डॉ. मणि दुबे, कार्डियोलॉजी से डॉ. आदित्य कपूर और पल्मोनरी मेडिसिन से डॉ. आलोक नाथ शामिल रहे। नर्सिंग टीम में अनीता सिंह, दीपिका, पूनम और रीता ने सहयोग किया।

