मार्क जुकरबर्ग ने CSAM, डीपफेक और एल्गोरिदम गड़बड़ी पर मांगी माफी, पीएम मोदी का वीडियो हटाने के बाद मचा था बवाल

Sandesh Wahak Digital Desk: सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने अपने प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक कंटेंट और एल्गोरिदम के संचालन में हुई गंभीर कमियों को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। जुकरबर्ग ने स्वीकार किया कि उनके प्लेटफॉर्म द्वारा कुछ खास तरह की अवांछित व संवेदनशील सामग्रियों को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर फंड/पैसे प्राप्त किए गए थे, जो कि एक बड़ी लापरवाही और विफलता थी। इस पर गहरा अफसोस जताते हुए उन्होंने सुधार का आश्वासन दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच जुकरबर्ग को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया गया है कि मेटा अब एक सामान्य ‘इंटरमीडियरी’ (मध्यस्थ) की कानूनी परिभाषा के दायरे में नहीं आता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका सिस्टम स्वयं यह तय करता है कि कौन सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा और किसे कितना प्रमोट किया जाएगा। कंटेंट क्यूरेशन और फीड पर सीधा नियंत्रण होने के कारण, सूचना प्रौद्योगिकी कानून (IT Act) के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ यानी कानूनी संरक्षण का अधिकार अब उन पर और उनके प्लेटफॉर्म पर सीधे तौर पर लागू नहीं होता है।

मार्क जुकरबर्ग के इस कबूलनामे के बाद दुनिया भर में टेक कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कानूनी जवाबदेही को लेकर बहस छिड़ गई है। अब तक आईटी कानूनों के तहत सोशल मीडिया कंपनियां ‘सेफ हार्बर’ का सहारा लेकर यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई आपत्तिजनक सामग्री के दायित्व से बचती रही हैं। गौरतलब है कि मेटा से पीएम मोदी का वीडियो हटाने के बाद से काफी बवाल मचा हुआ है। भारत सरकार ने नोटिस जारी कर माफी मांगने के लिए कहा था।

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