मेरठ में फर्जी वोट बढ़ाने के वायरल ऑडियो पर चुनाव आयोग का जवाब, आरोपों को बताया निराधार
Meerut Election News: मेरठ विधानसभा सीट पर बीएलओ की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से वोट बढ़ाने के आरोपों को चुनाव आयोग ने निराधार बताया है। आयोग ने मेरठ के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) यानी जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह बात कही है। डीईओ के अनुसार, यह मामला करीब एक महीने पहले सामने आया था। उस समय जांच कराई गई थी, जिसमें आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।
दूसरी ओर, मेरठ विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव परिणामों में निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन कमजोर रहा। भाजपा और सपा के उम्मीदवारों को छोड़कर मैदान में उतरे सभी 14 निर्दलीय प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके।
वायरल ऑडियो पर डीएम ने क्या कहा?
मेरठ के जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक ऑडियो क्लिप प्रसारित की जा रही है। इसमें मेरठ विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की कथित बातचीत होने का दावा किया जा रहा है।
डीएम के मुताबिक, ऑडियो क्लिप से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि किस बूथ पर तैनात बीएलओ की किस व्यक्ति से बातचीत हो रही है। उन्होंने बताया कि करीब एक महीने पहले भी यह मामला सामने आया था। उस समय विधायक रफीक अंसारी की शिकायत पर इसकी विस्तृत जांच कराई गई थी।
जांच में किसी भी बीएलओ की लॉगिन आईडी या बीएलओ ऐप के माध्यम से मिलने वाले ओटीपी को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मांगे जाने की पुष्टि नहीं हुई। इसी आधार पर आरोपों को निराधार बताया गया है।
मेरठ में ईआरओ बदलने की वजह भी बताई
जिलाधिकारी ने निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ईआरओ) को बदले जाने के मामले में भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि पहले मेरठ विधानसभा सीट के ईआरओ नगर मजिस्ट्रेट थे।
तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट के चिकित्सीय अवकाश पर जाने के कारण नगर निगम के अपर नगर आयुक्त को सक्षम स्तर से मंजूरी मिलने के बाद ईआरओ बनाया गया था।
इस तरह डीएम ने ईआरओ में बदलाव को प्रशासनिक कारणों से जुड़ा बताया। वायरल ऑडियो में लगाए गए आरोपों की जांच में बीएलओ की लॉगिन आईडी या ओटीपी के गलत इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई।
शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव में 14 निर्दलीयों की जमानत जब्त
मेरठ विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव परिणामों के साथ प्रत्याशियों के प्रदर्शन का ब्योरा भी सामने आया है। दोनों सीटों पर भाजपा और सपा के उम्मीदवारों को छोड़कर चुनाव लड़ रहे सभी 14 निर्दलीय प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, किसी प्रत्याशी को अपनी जमानत राशि बचाने के लिए कुल पड़े वैध मतों का कम से कम छठा हिस्सा यानी एक-छठा वोट हासिल करना जरूरी होता है। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार यह आंकड़ा हासिल नहीं कर सके।
दोनों सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के उम्मीदवारों के बीच रहा। निर्दलीय प्रत्याशियों को जरूरी मत नहीं मिलने के कारण उनकी जमा प्रतिभूति राशि जब्त हो गई। चुनाव परिणामों में प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों का मुकाबला निर्दलीय प्रत्याशियों पर भारी रहा।

