दम्पति शिक्षकों की बेसिक शिक्षा परिषद से अंतर्जनपदीय तबादले और रिक्त पदों को स्थानांतरण से भरने की गुहार
Lucknow News: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत कार्यरत हजारों दम्पति शिक्षक (पति-पत्नी) इन दिनों एक बड़े पारिवारिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए आंकड़ों के मुताबिक, ऐसे सैकड़ों शिक्षक परिवार हैं जहां पति और पत्नी दोनों ही सरकारी सेवा में हैं, लेकिन उनकी तैनाती अलग-अलग जनपदों में है। सालों से अपने जीवनसाथी और परिवार से दूर रहकर सुदूर इलाकों में सेवाएं देने के कारण ये शिक्षक गंभीर मानसिक तनाव, सामाजिक दूरी और पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करने को मजबूर हैं।
शिक्षकों का कहना है कि अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग होने की वजह से सबसे ज्यादा असर उनके छोटे बच्चों की परवरिश और घर के बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल पर पड़ रहा है। पीड़ित शिक्षकों ने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए मांग की है कि वर्तमान में चल रहे ग्रीष्मावकाश (गर्मियों की छुट्टियों) के दौरान ही एक सरल, स्पष्ट और पारदर्शी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके जरिए दम्पति शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर एक ही जनपद में तैनात होने का अवसर दिया जाना चाहिए।
समाचार पत्रों के दावों से बढ़ी चिंता
शिक्षकों के बीच इस समय सबसे बड़ी चिंता नगर क्षेत्र के विद्यालयों में होने वाली नई नियुक्तियों को लेकर है। विभिन्न मीडिया माध्यमों और विभागीय हलकों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, शासन स्तर पर शहरी क्षेत्रों के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सीधी भर्ती (नई नियुक्तियां) कराने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। शिक्षकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए याद दिलाया कि पूर्व की व्यवस्था के तहत इन शहरी और नगर क्षेत्रों के रिक्त पदों को हमेशा पहले से कार्यरत शिक्षकों के स्थानांतरण (तबादले) के माध्यम से भरा जाता रहा है।
शिक्षकों का तर्क है कि यदि कानपुर, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख और बड़े जनपदों के खाली पदों को सीधे नई भर्ती से भर दिया गया, तो अपने गृह जनपद या जीवनसाथी के पास आने की उम्मीद लगाए बैठे हजारों अनुभवी शिक्षकों की राह हमेशा के लिए बंद हो जाएगी। शिक्षक संगठनों ने सरकार से बेहद न्यायसंगत नीति अपनाने की मांग करते हुए कहा है कि विभाग को पहले इन रिक्त पदों पर स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए, और उसके बाद जो पद शेष बच जाएं, उन पर नई भर्ती का विज्ञापन जारी करना चाहिए।
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