राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और सीएम योगी ने किया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, 3 घंटे की दूरी अब महज 45 मिनट में होगी पूरी
Lucknow News: उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से नवनिर्मित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। 63 किलोमीटर लंबा यह बेहद आधुनिक और हाईस्पीड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक राजधानी लखनऊ को राज्य की औद्योगिक राजधानी कानपुर से सीधे और निर्बाध रूप से जोड़ेगा। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों महानगरों के बीच यात्रा का समय 3 घंटे से घटकर सिर्फ 40 से 45 मिनट रह जाने की उम्मीद है। उद्घाटन समारोह संपन्न होने के साथ ही इसे आम जनता के आवागमन के लिए खोल दिया गया है।
4,200 करोड़ रुपये की लागत और विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग की मिसाल
लगभग 4,200 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश से तैयार यह 6-लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे आधुनिक इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। इस प्रोजेक्ट की कुछ खास विशेषताएं इस प्रकार हैं।
लेन और विस्तार: वर्तमान में यह 6-लेन का है, जिसे भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 8-लेन तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।
फ्लाईओवर और अंडरपास: सुचारू यातायात के लिए इसमें 3 इंटरचेंज, 2 बड़े फ्लाईओवर, 1 रोड ओवरब्रिज (ROB), 4 बड़े पुल और 25 छोटे पुल बनाए गए हैं। इसके अलावा राहगीरों और वाहनों के लिए 37 अंडरपास (गाड़ियों, हल्के वाहनों और पैदल यात्रियों के लिए) तैयार किए गए हैं।
ग्रीनफील्ड और एलिवेटेड रूट: इस एक्सप्रेसवे का 45.2 किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह ग्रीनफील्ड (90 मीटर चौड़ा) है, जबकि 17.5 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड (जमीन से ऊपर) बनाया गया है।
#WATCH | Uttar Pradesh: Defence Minister Rajnath Singh, Union Minister of Road Transport and Highways Nitin Gadkari, and Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath attend the inauguration ceremony of the Kanpur-Lucknow Expressway in Unnao district pic.twitter.com/fvjjtPd8f1
— ANI (@ANI) July 13, 2026
सुरक्षा और तकनीक: इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम (ITMS) से लैस
यात्रियों की सुरक्षा और गति नियंत्रण के लिए इस एक्सप्रेसवे में बेहद उन्नत इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) इंस्टॉल किया गया है।
इसके तहत पूरे रूट पर नजर रखने के लिए 63 पीटीजी (PTZ) कैमरे, 27 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम (VIDS), और त्वरित सहायता के लिए 62 इमरजेंसी कॉल बॉक्स लगाए गए हैं। वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए 6 स्पीड रडार और ओवरलोडिंग रोकने के लिए 9 स्टैटिक वे-ब्रिज (धर्मकांटा) भी स्थापित किए गए हैं। एक्सप्रेसवे पर कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किमी/घंटा और ट्रकों के लिए 100 किमी/घंटा तय की गई है।
एक एक्सप्रेसवे के चार नाम
इस हाईस्पीड कॉरिडोर को देश में चार अलग-अलग नामों से पहचान मिली है।
नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (NE-6)
अवध एक्सप्रेसवे
ग्रीन कॉरिडोर एक्सप्रेसवे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस निर्माण में करीब 4 लाख क्यूबिक मीटर फ्लाई ऐश (शहरी/औद्योगिक राख) का पुनर्चक्रण किया गया है और एक्सप्रेसवे के किनारे व डिवाइडर पर 46,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं।

आर्थिक और औद्योगिक क्रांति का बनेगा जरिया
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से न केवल मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी। तेज कनेक्टिविटी के चलते कृषि उत्पादों और फैक्ट्रियों में बनने वाले औद्योगिक सामानों को बेहद कम समय में बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस कॉरिडोर के आसपास आने वाले समय में बड़े लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग हब, नए उद्योग, पर्यटन केंद्र और आवासीय टाउनशिप विकसित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।
इस भव्य उद्घाटन समारोह में वीआईपी मेहमानों के रूप में यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज और कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

