सरकार गिराने के आरोपों पर फंसे सीएम उमर अब्दुल्ला, भाजपा ने भेजा 100 करोड़ का मानहानि नोटिस
Sandesh Wahak Digital Desk: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी ही सरकार को गिराने और विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों को लेकर बुरी तरह घिर गए हैं। भारतीय जनता पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई ने मुख्यमंत्री के इन दावों को पूरी तरह से मनगढ़ंत, झूठा और बेबुनियाद करार देते हुए उन्हें एक लीगल (कानूनी) नोटिस थमा दिया है। जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने हाईकोर्ट के जाने-माने वकील परिमोक्ष सेठ के माध्यम से यह नोटिस भिजवाया है, जिसमें उमर अब्दुल्ला से उनके विवादित बयानों पर जवाब मांगा गया है।
क्या हैं उमर अब्दुल्ला के आरोप
दरअसल, यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान शुरू हुआ था। मुख्यमंत्री को भेजे गए नोटिस में उनके बयानों का हवाला देते हुए लिखा गया है, 11 जुलाई को श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आपने (उमर अब्दुल्ला) भाजपा के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और मानहानिकारक आरोप लगाए। आपने सार्वजनिक मंच से कहा कि भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी ने जम्मू क्षेत्र के नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के कुछ विधायकों को पाला बदलने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये नगद और नई सरकार में मंत्री पद देने का प्रलोभन दिया है। इसके साथ ही उमर ने यह भी आरोप लगाया था कि रिश्वत की पेशकश करने वाला भाजपा का वह वरिष्ठ नेता सुप्रीम कोर्ट का वकील भी है।
भाजपा का तीखा पलटवार- छवि खराब करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश
भाजपा ने इन सभी आरोपों को एक सिरे से खारिज करते हुए लीगल नोटिस में लिखा है कि मुख्यमंत्री के पास इन दावों को साबित करने के लिए न तो कोई आधार है और न ही कोई पुख्ता सबूत। नोटिस के मुताबिक, उमर अब्दुल्ला ने जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मंशा से भाजपा की सार्वजनिक छवि और साख को नुकसान पहुंचाने के लिए यह मनगढ़ंत कहानी गढ़ी है। सत्ता के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना और झूठे आरोप लगाना कानूनन अपराध है, जो दीवानी और आपराधिक मानहानि के दायरे में आता है।
7 दिन में बिना शर्त माफी मांगें
कानूनी नोटिस के जरिए भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने सख्त मांगें रखी हैं। पार्टी ने मुख्यमंत्री से अपने सभी आरोपों को तुरंत वापस लेने और नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना किसी शर्त के माफी मांगने को कहा है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि भविष्य में इस तरह के भ्रामक बयानों को न दोहराया जाए। भाजपा ने साफ किया है कि यदि निर्धारित समय में माफी नहीं मांगी गई, तो मुख्यमंत्री के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा, जिसके विधिक परिणामों के जिम्मेदार वह खुद होंगे।
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