CO जियाउल हक हत्याकांड में राजा भैया को राहत, CBI रिपोर्ट कोर्ट में स्वीकार, आगे की कार्यवाही खारिज
Ziaul Haq Murder Case: बहुचर्चित कुंडा के CO जियाउल हक हत्याकांड में पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया (Raja Bhaiya) समेत पांच लोगों को बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट CBI प्रतिभा सिंह की अदालत ने मामले में CBI की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही राजा भैया समेत पांच लोगों के खिलाफ इस मामले में आगे कोई अदालती कार्यवाही नहीं होगी।
यह कार्रवाई मृतक CO की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दर्ज कराई गई चौथी FIR से जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की दोबारा जांच CBI ने की थी और जांच पूरी होने के बाद राजा भैया समेत पांच लोगों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी।
2 मार्च 2013 को हुई थी तीन हत्याएं
मामला 2 मार्च 2013 को प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव में जमीन विवाद से शुरू हुआ था। शाम करीब साढ़े सात बजे ग्राम प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद उनके समर्थक बलीपुर पहुंचे और आरोपी के घर में आग लगा दी।
सूचना पर तत्कालीन CO कुंडा जियाउल हक पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान हुई झड़प में प्रधान के भाई सुरेश यादव की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद उग्र भीड़ ने CO जियाउल हक को घेर लिया और उनकी भी हत्या कर दी।
एक ही घटना को लेकर दर्ज हुई थीं चार FIR
पत्रावली के मुताबिक, 2 मार्च 2013 को इस तिहरे हत्याकांड से संबंधित चार FIR दर्ज हुई थीं। पहली FIR तत्कालीन हथिगवां थाना प्रभारी मनोज शुक्ला ने नन्हे यादव के भाइयों और बेटे समेत 10 लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसके अलावा नन्हे यादव और सुरेश यादव की हत्या को लेकर भी अलग मुकदमे दर्ज हुए।
CO जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने भी आखिरी FIR दर्ज कराई थी। सभी मामले एक ही घटना से जुड़े होने के कारण इनकी विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद 9 अक्टूबर 2024 को मामले के सभी अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
CBI ने दो बार दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट
CBI ने अदालत को बताया कि इस मामले में पहली क्लोजर रिपोर्ट 31 जुलाई 2013 को दाखिल की गई थी। इसके खिलाफ वादिनी परवीन आजाद ने प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दिया। अदालत के आदेश पर 8 जुलाई 2014 को मामले की आगे की विवेचना शुरू हुई।
इसके बाद CBI ने 22 दिसंबर 2023 को दोबारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद विशेष अदालत ने CBI की रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
हालांकि, इसके बाद परवीन आजाद ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की गहराई से जांच की गई और CBI की ओर से दाखिल रिपोर्ट के आधार पर अब विशेष अदालत ने Ziaul Haq Murder Case की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है।
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