ट्रंप के नए टैरिफ ने बढ़ाई भारत की टेंशन, जेनेरिक दवाओं पर 200% शुल्क लगाने का ऐलान
US Tariff on Generic Medicines: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जेनेरिक दवाओं पर बड़ा फैसला लेते हुए 200% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप का कहना है कि इस कदम का मकसद दवा निर्माण को दोबारा अमेरिका में बढ़ावा देना और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना है। हालांकि, इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका भारतीय जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा बाजार है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर घोषणा करते हुए बताया कि नई US Tariff नीति 1 अगस्त 2026 से लागू होगी। शुरुआती दो वर्षों तक अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन इसके बाद टैरिफ में भारी बढ़ोतरी की जाएगी।
क्या है ट्रंप का नया टैरिफ प्लान?
ट्रंप के मुताबिक,
- 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2028 तक: जेनेरिक दवाओं पर 0% टैरिफ
- इसके अगले एक साल: 100% टैरिफ
- फिर: टैरिफ बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जो दवा कंपनियां तय समय सीमा के भीतर अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित नहीं करेंगी, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नीति केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगी, जबकि पेटेंटेड और ब्रांडेड दवाओं पर मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।
भारत को क्यों लग सकता है बड़ा झटका?
भारत को दुनिया की ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ कहा जाता है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली जेनेरिक दवाओं का करीब 40% हिस्सा भारत से आता है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया, जो देश के कुल 25.8 अरब डॉलर के फार्मा निर्यात का लगभग 38% था।
भारतीय कंपनियां अमेरिका को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कैंसर, डिप्रेशन, संक्रमण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सस्ती जेनेरिक दवाएं बड़ी मात्रा में सप्लाई करती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में अमेरिका में गर्भनिरोधक गोलियों के लगभग 65% प्रिस्क्रिप्शन भारत की ग्लेनमार्क और ल्यूपिन जैसी कंपनियों द्वारा निर्मित दवाओं से पूरे किए गए थे।
क्या तुरंत पड़ेगा असर?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि US नई Tariff नीति का भारतीय दवा कंपनियों पर तत्काल कितना प्रभाव पड़ेगा। भारत और अमेरिका के बीच जेनेरिक दवाओं को लेकर पहले से व्यापार वार्ता चल रही है और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के तहत इस क्षेत्र में बातचीत जारी है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप की यह नीति तय समय पर लागू होती है, तो भारतीय फार्मा कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है और कई कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने पर विचार करना पड़ सकता है।
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