प्रतापगढ़ पुलिस के हत्थे चढ़ा 1 लाख का इनामी भानु प्रताप
Pratapgarh News: उत्तर प्रदेश की प्रतापगढ़ जिला पुलिस और स्वाट टीम के संयुक्त ऑपरेशन में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने पिछले 12 सालों से कस्टडी से फरार चल रहे एक लाख रुपये के मोस्ट वांटेड इनामी अपराधी को दबोच लिया है। प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक दीपक भुकर ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पकड़े गए शातिर अपराधी की पहचान भानु प्रताप दुबे उर्फ महाराज उर्फ विक्की (40 वर्ष) के रूप में हुई है, जो लालगंज थाना क्षेत्र के संगीयापुर गांव का रहने वाला है। पुलिस की घेराबंदी के आगे घुटने टेकते हुए वह लालगंज इलाके की नहर पटरी धधुआ गाजन गांव के पास से दबोचा गया।
भानु प्रताप दुबे का लंबा और खौफनाक आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ प्रतापगढ़ के अलग-अलग थानों में हत्या, लूट और रंगदारी जैसे कुल 19 संगीन मामले दर्ज हैं। वह साल 2014 में पुलिस को चकमा देकर अभिरक्षा (कस्टडी) से भाग निकला था, जिसके बाद से ही यूपी पुलिस की कई टीमें उसकी परछाई का पीछा कर रही थीं।
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पुलिस पूछताछ में आरोपी की फरारी के दिनों के कई चौंकाने वाले राज सामने आए हैं। जेल में रहने के दौरान भानु प्रताप की मुलाकात अंतरराज्यीय अपराधियों से हुई थी। साल 2014 में भागने के बाद वह कुछ समय तक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जंगलों और कस्बों में छिपकर रहा। इसके बाद अपने क्रिमिनल नेटवर्क की मदद से उसने गुजरात के सूरत शहर में पनाह ली।
गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने न सिर्फ अपना हुलिया बदला, बल्कि अपनी पहचान भी पूरी तरह बदल डाली। उसने सूरत के किमावती कॉम्प्लेक्स के पते पर ‘दुबे विक्की रामविलास’ नाम से फर्जी राशन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड (मतदाता पहचान पत्र) तैयार करवा लिया। इस नई पहचान के सहारे वह सूरत में ट्रक ड्राइवर के रूप में काम करने लगा। इतना ही नहीं, साल 2020 में उसने यूपी के ही फर्रुखाबाद जिले के फर्जी पते पर अपना ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी करवा लिया था ताकि किसी चेकिंग में पकड़ा न जाए। एसपी ने बताया कि फिलहाल आरोपी को जेल भेज दिया गया है और फरारी के दौरान उसकी मदद करने वाले पूरे सिंडिकेट को खंगाला जा रहा है।
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