UP के ‘दलबदलू’ विधायकों का पूरा हिसाब: BJP में 78, सपा में 29, कांग्रेस का भी चौंकाने वाला आंकड़ा
UP Defector MLAs List: उत्तर प्रदेश की राजनीति में दल बदल कोई नई बात नहीं है, लेकिन ताजा आंकड़े एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं। विधानसभा के मौजूदा 399 विधायकों में 122 ऐसे हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कम से कम एक बार पार्टी बदली है। यानी प्रदेश का लगभग हर तीसरा विधायक किसी न किसी दल से पाला बदलकर मौजूदा पार्टी तक पहुंचा है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि दलबदलुओं को सबसे ज्यादा जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) में मिली है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) भी इस मामले में पीछे नहीं है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इन आंकड़ों ने एक बार फिर राजनीतिक अवसरवाद और विचारधारा की बहस को हवा दे दी है।
किस पार्टी में कितने दलबदलू विधायक?
UP Defector MLAs List: उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा दलबदलू विधायक बीजेपी में हैं।
- बीजेपी: 78 विधायक
- समाजवादी पार्टी: 29 विधायक
- कांग्रेस: अपने मौजूदा विधायकों में लगभग आधे दूसरे दलों से आए
- निषाद पार्टी: करीब 80% विधायक दलबदल कर आए
- सुभासपा (ओपी राजभर): लगभग 50% विधायक दूसरे दलों से
- राष्ट्रीय लोकदल (RLD): करीब 33% विधायक बाहरी पृष्ठभूमि के
- अपना दल (एस): लगभग 31% विधायक पहले किसी अन्य दल में थे
यानी सिर्फ बड़ी पार्टियां ही नहीं, बल्कि छोटे सहयोगी दलों में भी दलबदल करने वाले नेताओं की हिस्सेदारी काफी अधिक है।
लोकसभा तक पहुंचा दलबदल का असर
दल बदल का असर सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश से चुने गए लोकसभा सांसदों में भी बड़ी संख्या ऐसे नेताओं की है, जिन्होंने पहले दूसरी पार्टियों में राजनीति की।
आंकड़ों के अनुसार:
- समाजवादी पार्टी के 19 सांसद दलबदल की राजनीति से जुड़े रहे हैं।
- बीजेपी के 15 सांसद भी किसी अन्य दल से आकर पार्टी में शामिल हुए थे।
दलबदल के सबसे चर्चित चेहरे
UP के Defector MLAs की List में सबसे चर्चित दलबदलुओं में दारा सिंह चौहान का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में पांच बार पार्टी बदली और बसपा, भाजपा तथा सपा का सफर तय करने के बाद दोबारा बीजेपी में लौटे। वर्तमान में वे योगी सरकार में मंत्री हैं।
इसी तरह नंद गोपाल नंदी, राकेश सचान और एसपी सिंह बघेल जैसे कई बड़े नेताओं ने भी अलग-अलग दलों का सफर तय करने के बाद मौजूदा राजनीतिक ठिकाना बनाया।
नेता आखिर पार्टी क्यों बदलते हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इसके पीछे कई वजहें होती हैं।
- सत्ता के करीब रहकर राजनीतिक प्रभाव बनाए रखना।
- चुनाव से पहले टिकट कटने की आशंका।
- क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के हिसाब से नई पार्टी चुनना।
- जीत की संभावना (Winnability) को प्राथमिकता देना।
2027 चुनाव से पहले बढ़ सकती है हलचल
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले 35 से 40 फीसदी मौजूदा विधायकों के टिकट कट सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश में एक बार फिर बड़े पैमाने पर दल बदल देखने को मिल सकता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में विचारधारा की अहमियत लगातार कम होती जा रही है, या फिर चुनाव जीतना ही नेताओं की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। इसका जवाब आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता देगी।
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