लखनऊ में 30 हजार अवैध इमारतें और 241 कॉलोनियां, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हलचल
Lucknow Illegal Construction: सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण को लेकर अथॉरिटी को फटकार लगाई है। जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सोमवार को लोकेश कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान अवैध निर्माण पर चिंता जताई। मेरठ का मामला अब लखनऊ के लिए भी अहम हो गया है, क्योंकि राजधानी में अवैध निर्माण का आंकड़ा 30 हजार से ज्यादा पहुंच चुका है।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के सामने भी अवैध अपार्टमेंट, कॉम्प्लेक्स, रो हाउस और प्लाटिंग सोसाइटी बड़ी चुनौती हैं। करीब चार साल पहले शहर में लगभग 12,500 अवैध निर्माण होने का दावा किया गया था, लेकिन अब यह संख्या करीब 30 हजार तक पहुंचने की बात सामने आई है। इनमें से करीब 2,500 से ज्यादा मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
241 अवैध कॉलोनियां भी चिन्हित
राजधानी में 241 अवैध आवासीय कॉलोनियां (Lucknow Illegal Residential Colonies) भी चिन्हित हैं। गोमती नगर, शहीद पथ और गोमती नगर विस्तार में आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक इस्तेमाल और होटल निर्माण के मामले भी सामने आए हैं। कई जगह एलडीए की सीलिंग के बावजूद निर्माण जारी रहने के आरोप हैं।
दिसंबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अशोक कुमार समेत पांच याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बहुमंजिला इमारतों के अवैध निर्माण को लेकर एलडीए से जवाब मांगा था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कई इमारतों में स्वीकृत नक्शे से ज्यादा मंजिलें बनाई गईं और अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण हुआ।
अलीगंज में 51 अवैध निर्माण मिले
अलीगंज के एक अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में आग लगने के बाद भी यह मुद्दा फिर सामने आया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने Google Street View तकनीक के जरिए सिर्फ अलीगंज क्षेत्र में 51 अवैध निर्माण चिन्हित किए थे। LDA ने उस समय शहर में 101 अवैध भवनों को गिराने की कार्रवाई जल्द शुरू करने का दावा किया था, लेकिन अब तक कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है।
LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार यह स्वीकार कर चुके हैं कि राजधानी में सिर्फ करीब 6 प्रतिशत भवनों के पास वैध नक्शे हैं। ऐसे में मेरठ मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब सवाल उठ रहा है कि लखनऊ के हजारों अवैध निर्माणों (Lucknow Illegal Construction) पर प्रशासन और एलडीए किस तरह की कार्रवाई करते हैं।

