90 अमेरिकी नेताओं ने RSS से जुड़े चंदे को ठुकराने का किया ऐलान, मोहन भागवत के US दौरे का असर?
RSS Donation Pledge: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा के कुछ दिनों बाद अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिका के 90 नेताओं और उम्मीदवारों ने RSS से जुड़े लोगों और सहयोगी संस्थाओं से मिलने वाले आर्थिक योगदान को स्वीकार नहीं करने का संकल्प लिया है।
इस पहल में भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना और प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं। अभियान से जुड़े समूहों के मुताबिक, यह संकल्प भागवत की अमेरिका और कनाडा यात्रा के जवाब में शुरू किया गया है।
31 अगस्त को ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स एक्शन’ और ‘साउथ एशियन अमेरिकन कोएलिशन टू रिन्यू डेमोक्रेसी एक्ट्स’ (SACRED Acts) समेत सहयोगी संगठनों ने इसकी घोषणा की। इसमें आठ अमेरिकी राज्यों के संघीय, राज्य और स्थानीय स्तर के निर्वाचित नेता और उम्मीदवार शामिल हैं। खास बात यह है कि इस समूह में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों से जुड़े लोग बताए गए हैं।
भागवत के कार्यक्रम के बाद आया ऐलान
यह घोषणा 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में मोहन भागवत के कार्यक्रम के कुछ दिन बाद हुई। वहां उन्होंने अलग-अलग धर्मों के बीच समझ और ‘सार्वभौमिक एकता’ को बढ़ावा देने की बात रखी थी। अभियान चलाने वाले संगठनों ने इसी यात्रा को अपने संकल्प की वजह बताया है।
हिंदू अमेरिकन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ने किया विरोध
दूसरी ओर, हिंदू अमेरिकन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ने इस पहल की आलोचना की है। कमेटी ने इसे ‘कट्टरपंथी वामपंथी संगठनों’ की पहल बताते हुए ‘अमेरिका-विरोधी और हिंदू-विरोधी’ करार दिया।
‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स एक्शन’ खुद को लोकतंत्र, मानवाधिकार और बहुलतावाद की रक्षा की वकालत करने वाला राजनीतिक समूह बताता है। वहीं SACRED Acts लोकतंत्र और सामूहिक मुक्ति को बढ़ावा देने वाला गठबंधन होने का दावा करता है और अमेरिका में श्वेत वर्चस्ववादी आंदोलनों तथा चरमपंथी दक्षिण एशियाई अमेरिकी समूहों के बीच कथित गठजोड़ को उजागर करने पर काम करता है।
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