गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर हिंदुस्तान की दहाड़, अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को ‘अशोक चक्र’; बग्घी पर सवार होकर पहुंचीं राष्ट्रपति
Sandesh Wahak Digital Desk: आज पूरा देश 77वें गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा है। दिल्ली का कर्तव्य पथ गवाह बन रहा है उस अटूट साहस और गौरवशाली विरासत का, जिसे देखकर हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाए। तिरंगे की आन-बान-शान और सेना के पराक्रम के बीच पूरी दुनिया भारत की बढ़ती ताकत को देख रही है।
आसमान से बरसे फूल, गूंजा राष्ट्रगान
समारोह का आगाज़ बेहद रोमांचक रहा। भारतीय वायु सेना की 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार Mi-17 हेलीकॉप्टरों ने ‘ध्वज फॉर्मेशन’ में उड़ान भरी और कर्तव्य पथ पर मौजूद दर्शकों पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं। इस शानदार फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत ने किया।
इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तिरंगा फहराया। स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से दी गई 21 तोपों की सलामी और राष्ट्रगान की गूंज ने पूरे माहौल को देशभक्ति से भर दिया।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को ‘अशोक चक्र’
इस बार का गणतंत्र दिवस एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। भारतीय अंतरिक्ष यात्री और वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया। अंतरिक्ष की गहराइयों से लेकर देश की सुरक्षा तक उनके योगदान ने आज हर भारतीय को गौरवान्वित किया है।
बग्घी की शाही सवारी और खास मेहमान
परंपरा और आधुनिकता के संगम के बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दोनों मुख्य अतिथियों के साथ पारंपरिक बग्घी पर सवार होकर कर्तव्य पथ पहुंचीं। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मजोशी के साथ उनकी और विदेशी मेहमानों की अगवानी की।
क्यों खास है 26 जनवरी?
आज ही के दिन 1950 में हमारा संविधान लागू हुआ था, जिसने भारत को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बनाया। 15 अगस्त को मिली आज़ादी को 26 जनवरी ने एक मजबूत संवैधानिक आधार दिया। आज कर्तव्य पथ पर निकलने वाली झांकियां न केवल हमारी सैन्य शक्ति, बल्कि भारत की ‘विविधता में एकता’ वाली सांस्कृतिक झलक को भी पेश कर रही हैं।
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