“सेवा से मिली पहचान”: वाराणसी में रतन कुमार गुप्ता स्मृति राष्ट्रीय सेवा सम्मान, 18 प्रतिभाएं सम्मानित

Sandesh Wahak Digital Desk : बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल की ओर से आयोजित एक भव्य और गरिमामय समारोह में “रतन कुमार गुप्ता स्मृति राष्ट्रीय सेवा सम्मान” के तहत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 18 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मण्डल के राष्ट्रीय संरक्षक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने चयनित व्यक्तियों को सम्मान प्रदान किया।

इस मौके पर वक्ताओं ने स्वर्गीय रतन कुमार गुप्ता (पुत्र स्व. रामाधार गुप्ता) के व्यक्तित्व और समाज सेवा में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि रतन कुमार गुप्ता ने बिना किसी पद या प्रतिष्ठा की चाह के समाज सेवा को अपना जीवन बना लिया था। यही कारण है कि उनकी स्मृति में शुरू किया गया यह सम्मान अब समाज के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

सेवा और समर्पण की मिसाल थे रतन कुमार गुप्ता

वक्ताओं ने बताया कि स्व. रतन कुमार गुप्ता का नाम भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल तक फैले समाज में आत्मीयता और विश्वास का प्रतीक था। सामाजिक आयोजनों में भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी खुद लेना, अतिथियों का स्वागत करना और सेवा की परंपरा निभाना उनकी खास पहचान थी।

समाज में अत्यधिक सम्मान मिलने के बावजूद उन्होंने कभी कोई पद स्वीकार नहीं किया। उनकी इस सेवा भावना को उनके पुत्र निखिल कुमार गुप्ता आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिल रही है।

पिछले वर्षों में भी हुआ उत्कृष्ट प्रतिभाओं का सम्मान

इस सम्मान की शुरुआत वर्ष 2024 में की गई थी। उस वर्ष मनीष कुमार साव (महाराष्ट्र) को युवा उद्यमी, सूरज गुप्ता (उत्तर प्रदेश) को स्वास्थ्य सेवा, संतोष कुमार (बिहार) को शिक्षा, नेहा गुप्ता (उत्तर प्रदेश) को खेल और अभिषेक कुमार गुप्ता (उत्तर प्रदेश) को समाज सेवा के क्षेत्र में सम्मानित किया गया था।

वर्ष 2025 में सम्मान का दायरा और बढ़ाया गया। इस दौरान राजीव गुप्ता (वाराणसी) को उद्यमिता, कृष्ण कुमार गुप्ता और बलराम गुप्ता (पश्चिम बंगाल) को स्वास्थ्य सेवा, मनीष गुप्ता (गाजीपुर) को समाज सेवा, नवल मद्धेशिया (बलिया) को शिक्षा, प्रतीक मद्धेशिया (बरहज) को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी और नंद कुमार गुप्ता (चंदौली) को खेल प्रशिक्षक के रूप में सम्मानित किया गया।

रक्तदाताओं को मिला विशेष सम्मान

समारोह में रक्तदान करने वाले लोगों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसमें राजेश गुप्ता “सेंचुरियन” (वाराणसी) ने 115 बार, संतोष मद्धेशिया (देवरिया) ने 24 बार, आशुतोष गुप्ता (वाराणसी) ने 41 बार, मनोज मद्धेशिया (मुंबई) ने 49 बार, अंगद गुप्ता (कसया) ने 51 बार और राकेश गुप्ता (गाजीपुर) ने 60 बार रक्तदान कर समाज सेवा की मिसाल पेश की।

वक्ताओं ने कहा कि ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि अनगिनत जिंदगियां बचाने का प्रतीक हैं।

पारदर्शी चयन प्रक्रिया से बढ़ी विश्वसनीयता

सम्मान के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई थी, जिसमें डॉ. मनोज कुमार गुप्ता (वरिष्ठ ईएनटी सर्जन, वाराणसी), श्रीमती अर्चना गुप्ता (पूर्व राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष, रांची) और अमरजीत कुमार शाह (प्रदेश अध्यक्ष, गुजरात) शामिल थे। समिति की पारदर्शी प्रक्रिया के कारण इस सम्मान की विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है।

सेवा ही सच्ची पहचान

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय रतन कुमार गुप्ता का जीवन यह सिखाता है कि महानता किसी पद से नहीं, बल्कि सेवा से मिलती है। समाज को आगे बढ़ाने के लिए हर व्यक्ति को सेवा कार्यों में भागीदारी करनी चाहिए।

उनकी पुण्य स्मृति को नमन करते हुए सभी ने समाज सेवा के इस अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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