स्पेशल कोर्ट गठन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, 17 हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस

Sandesh Wahak Digital Desk: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के गठन (Special Court Formation) से जुड़े मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने 17 हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर हाई कोर्ट के विचार भी बेहद जरूरी हैं, क्योंकि कई राज्यों में विशेष कानूनों के तहत बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।

NIA और UAPA मामलों की संख्या पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे जानकारी मिली है कि 17 ऐसे राज्य हैं, जहां NIA के तहत 10 से अधिक मुकदमे, विशेष रूप से UAPA के अंतर्गत लंबित हैं। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अदालतों के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि क्या सरकार विशेष NIA अदालतों की स्थापना के लिए फंड का एक निश्चित हिस्सा आवंटित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सहमति जताई। इसके बाद सीजेआई ने UAPA और नारकोटिक्स से जुड़े मामलों को भी इसमें शामिल करने की बात कही।

अधिकार क्षेत्र और फंडिंग को लेकर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक दृष्टिकोण से ये सभी मामले सीधे उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि बुनियादी ढांचे के विकास के लिए फंड जारी किया जाए, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि इसका उपयोग केवल निर्माण कार्यों के लिए ही हो।

राज्यों की भूमिका पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले भी 60 फीसदी फंड दिए जाने के बावजूद कुछ नौकरशाही अड़चनों के कारण वह राशि न्यायपालिका तक नहीं पहुंच सकी। अदालत ने हरियाणा का उदाहरण देते हुए बताया कि राज्य में 18 विशेष अदालतें स्थापित की गई हैं, लेकिन कई अदालतों की अध्यक्षता एक ही जज कर रहे हैं। कोर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्यों के सहयोग के बिना इस व्यवस्था को प्रभावी बनाना मुश्किल है।

गुजरात में NIA मामलों के लिए अलग अदालत

सुनवाई के दौरान गुजरात के एजी कमल त्रिवेदी ने जानकारी दी कि राज्य में केवल NIA मामलों के लिए एक विशेष अदालत बनाई गई है। इस पर सीजेआई ने कहा कि केंद्र सरकार NIA मामलों के लिए एक अदालत को फंड दे रही है, जबकि अन्य अदालतों का गठन राज्य सरकारें अपने स्तर पर कर सकती हैं।

चार हफ्ते बाद मामले की अगली सुनवाई

इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी UAPA और MCOCA जैसे विशेष कानूनों के तहत लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए स्पेशल कोर्ट के गठन का सुझाव दिया था, जिस पर अब आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

 

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