अवैध प्रवासियों को भारत देश में न मिले रोजगार: मोहन भागवत

Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने मंगलवार को वृंदावन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने भारत में गैर-कानूनी घुसपैठ को लेकर चिंता जताते हुए लोगों से सतर्क रहने और घुसपैठियों की पहचान कर अधिकारियों को सूचना देने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों को देश में रोजगार नहीं मिलना चाहिए।

जीवनदीप आश्रम के लोकार्पण के बाद संबोधन

मोहन भागवत ने वृंदावन के रुक्मिणी विहार स्थित नव-निर्मित जीवनदीप आश्रम का लोकार्पण किया। इसके बाद अपने संबोधन में उन्होंने वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए अमेरिका और चीन जैसे देशों की आक्रामक नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जहां अन्य देश अपने मॉडल को दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं, वहीं भारत का दृष्टिकोण अधिक उदार है और वह सभी विचारों को सम्मान देता है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने आर्थिक मॉडल को सर्वश्रेष्ठ बताता है और चीन भी अपने मॉडल को सभी के लिए उपयुक्त बताने की कोशिश करता है। इसके विपरीत भारत किसी भी विचार को दूसरों पर थोपने में विश्वास नहीं करता, बल्कि सभी के नजरिए को सही मानने की सोच रखता है।

तीन बच्चों की नीति पर दिया जोर

मोहन भागवत ने जनसंख्या को लेकर भी अपनी बात रखी और तीन बच्चों की नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पारिवारिक सेहत और सामाजिक संतुलन के लिए तीन बच्चों का होना बेहतर माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कम फर्टिलिटी रेट लंबे समय में खतरा पैदा कर सकता है, इसलिए भारत की जनसंख्या नीति पर फिर से विचार करने की जरूरत है।

उन्होंने जबरदस्ती धर्मांतरण को समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि यह काम केवल कानून के जरिए नहीं, बल्कि समाज के प्रयासों से संभव है। उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों में चले गए हैं, वे हिंदुओं के वंशज हैं और यदि वे वापस आना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए।

आश्रम व्यवस्था और संस्कृति पर जोर

मोहन भागवत ने कहा कि आश्रम भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनका किसी अन्य भाषा में सटीक अनुवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि आश्रम केवल जीवनयापन की शिक्षा नहीं देते, बल्कि जीवन को अर्थपूर्ण बनाने की दिशा में प्रेरित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज की अशांत दुनिया में भारत के पारंपरिक मूल्य और सनातन धर्म बेहद प्रासंगिक हैं और आश्रम इन मूल्यों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस कार्यक्रम में मोहन यादव, ब्रजेश पाठक सहित कई साधु-संत भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक और सामाजिक विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

 

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