कौन हैं राजेश मेहता? जिसपर है 15 लाख करोड़ की गड़बड़ी का आरोप, LIC को भी लगा करोड़ों का झटका
Lucknow News: देश की प्रमुख गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी निर्माण कंपनियों में शामिल Rajesh Exports इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी और इसके चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई करते हुए वित्तीय आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए हैं।
नियामक संस्था का आरोप है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपने कारोबार और राजस्व से जुड़ी जानकारी निवेशकों के सामने वास्तविक स्थिति से अलग तरीके से पेश की। SEBI की कार्रवाई के बाद कंपनी के शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली। इसका असर कंपनी में हिस्सेदारी रखने वाली LIC के निवेश पर भी पड़ा।
जांच में क्या सामने आया?
SEBI के मुताबिक Rajesh Exports ने अपने वित्तीय प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों में बड़ी अनियमितताएं दिखाई हैं। जांच में दावा किया गया है कि कंपनी ने करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू की रिपोर्टिंग की, जिसमें अधिकांश हिस्से को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।
इसके अलावा प्रमोटर समूह से जुड़ी संस्थाओं के साथ वित्तीय लेनदेन और फंड के इस्तेमाल को लेकर भी नियामक ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। हालांकि मामले की अंतिम जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।
कौन हैं राजेश मेहता?
Rajesh Mehta का जन्म 20 जून 1964 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही अपने पिता के ज्वेलरी कारोबार से जुड़कर व्यापारिक सफर शुरू किया। 1980 के दशक में अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ चांदी के आभूषणों का कारोबार शुरू किया, जिसके लिए उन्होंने परिवार से मामूली पूंजी जुटाई थी।

धीरे-धीरे उनका कारोबार देश के कई बड़े बाजारों तक पहुंचा और 1995 में कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई। इसके बाद Rajesh Exports ने गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी कारोबार में तेजी से विस्तार किया।
कंपनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान तब मिली जब उसने वर्ष 2015 में स्विट्जरलैंड की प्रसिद्ध गोल्ड रिफाइनरी Valcambi का अधिग्रहण किया। इस सौदे को भारतीय ज्वेलरी उद्योग की बड़ी उपलब्धियों में गिना गया था।
हालांकि अब SEBI की कार्रवाई के बाद कंपनी एक नए विवाद के केंद्र में आ गई है। नियामक ने राजेश मेहता को फिलहाल शेयर बाजार में कारोबार करने से भी रोक दिया है।
LIC पर भी पड़ा असर
Rajesh Exports में LIC की करीब 10.80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी के शेयर में आई गिरावट का असर LIC के निवेश मूल्य पर भी दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह हाल के वर्षों के सबसे चर्चित कॉर्पोरेट गवर्नेंस मामलों में शामिल हो सकता है।
फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजर SEBI की आगे की जांच और कंपनी के जवाब पर टिकी हुई है।
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