होर्मुज तो सिर्फ ट्रेलर… अगला संकट इससे भी भयंकर होगा, Raghuram Rajan की भारत को बड़ी चेतावनी
Raghuram Rajan Warning: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने भारत की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियों को लेकर अहम चेतावनी दी है। उनका कहना है कि दुनिया अभी भी भू-राजनीतिक तनाव, बाधित व्यापार मार्गों और टैरिफ विवादों के असर से पूरी तरह नहीं उबर पाई है। ऐसे में भारत को केवल मौजूदा संकटों पर नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के संभावित खतरों पर भी ध्यान देना होगा।
राजन के अनुसार, हाल के वैश्विक घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि देशों को अपनी आर्थिक और रणनीतिक तैयारी पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।
होर्मुज संकट ने दिखाई भारत की बड़ी कमजोरी
Raghuram Rajan ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंताओं ने भारत की ऊर्जा निर्भरता को उजागर किया है। भारत अपने कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी आयात का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए प्राप्त करता है।
उनका मानना है कि किसी संभावित संकट की स्थिति में भारत को बड़े रणनीतिक तेल भंडार की जरूरत पड़ेगी। साथ ही ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और बैकअप योजनाओं पर भी तेजी से काम करना होगा।
राजन ने यह भी कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) भविष्य का रास्ता जरूर है, लेकिन इस क्षेत्र में भी भारत कई जरूरी उपकरणों और कंपोनेंट्स के लिए आयात पर निर्भर है। इसलिए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
टैरिफ और व्यापार को लेकर क्या बोले?
वैश्विक व्यापार माहौल पर टिप्पणी करते हुए राजन ने कहा कि भारत फिलहाल उन परिस्थितियों से बेहतर स्थिति में है, जब उसे ऊंचे टैरिफ और व्यापारिक दबावों का सामना करना पड़ रहा था।
हालांकि उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में अतिरिक्त टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। ऐसे में भारत को अपने आयात और निर्यात दोनों के लिए ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ व्यापारिक संबंध विकसित करने चाहिए।
उनका मानना है कि किसी एक क्षेत्र या बाजार पर अधिक निर्भरता लंबे समय में जोखिम बढ़ा सकती है।
रुपये और निवेश को लेकर जताई चिंता
Raghuram Rajan ने पिछले कुछ वर्षों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह केवल तेल की कीमतों का असर नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ संरचनात्मक आर्थिक कारण भी हैं।
उनके मुताबिक, भारत को प्रवासी भारतीयों से मजबूत रेमिटेंस जरूर मिल रही है, लेकिन विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) आकर्षित करने की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि तेज आर्थिक विकास के दावों के बावजूद निजी निवेश में उसी अनुपात में वृद्धि क्यों नहीं दिखाई दे रही है। उनका मानना है कि निवेश बढ़ाने के लिए नीतिगत स्थिरता और भरोसेमंद माहौल जरूरी है।
अगले 3-5 साल में कहां है सबसे बड़ा खतरा?
रघुराम राजन ने कहा कि आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा जोखिम केवल तेल से जुड़ा नहीं हो सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि जेनेरिक दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण फार्मास्युटिकल इनपुट्स (API) की सप्लाई भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को अभी से रणनीतिक भंडार तैयार करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और मित्र देशों के साथ मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
राजन के अनुसार, हाल के वैश्विक संकटों को एक चेतावनी के रूप में देखने की जरूरत है। यदि समय रहते तैयारी नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्रों में नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
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