Japan PM से दिल्ली की बजाय गुवाहाटी में मिलेंगे मोदी, पूर्वोत्तर को विकास का नया इंजन बनाने की रणनीति

Sandesh Wahak Digital Desk: भारत और जापान के बीच होने वाली शिखर वार्ता इस बार महज एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक रणनीति और आर्थिक विकास के केंद्र में स्थापित करने की एक बड़ी पहल है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच असम और पूरे पूर्वोत्तर की सामरिक उपयोगिता कई गुना बढ़ गई है।

दक्षिण पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार

बंगाल की खाड़ी से लेकर दक्षिण पूर्व एशिया तक बनने वाले औद्योगिक गलियारे में असम को प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा रहा है। जापान इस क्षेत्र को केवल निवेश के अवसर के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री ने भी पूर्वोत्तर भारत, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण पूर्व एशिया को जोड़ने वाली औद्योगिक शृंखला की परिकल्पना की थी, जो अब जमीन पर उतरती दिख रही है।

मोदी सरकार की एक्ट ईस्ट नीति ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है। जहाँ पहले यह इलाका दिल्ली से दूर माना जाता था, वहीं अब इसे दक्षिण पूर्व एशिया से जोड़ने वाले प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा रहा है। म्यांमार, बांग्लादेश और आसियान देशों के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ने से असम की सामरिक और आर्थिक उपयोगिता कई गुना बढ़ गई है।

रोजगार, बुनियादी ढांचा और विकास

इस रणनीतिक साझेदारी का सबसे बड़ा लाभ असम और पूरे पूर्वोत्तर को मिलने वाला है। सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, वाहन निर्माण और डेटा केंद्रों जैसी परियोजनाएं लाखों युवाओं को नई दिशा देंगी। जापान सेमीकंडक्टर, एआई, 5G जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग बढ़ा रहा है। सड़क, रेल, जलमार्ग और हवाई संपर्क बेहतर होने से व्यापार और पर्यटन दोनों को गति मिलेगी। जापान लंबे समय से पूर्वोत्तर में संपर्क परियोजनाओं में सहयोग करता रहा है। पूर्वोत्तर अब केवल सीमावर्ती क्षेत्र नहीं रहेगा, बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति का नया इंजन बनेगा।

निवेश का केंद्र बनेगा असम

मोदी सरकार की सबसे बड़ी सफलता यही रही है कि उसने पूर्वोत्तर को सुरक्षा समस्या की बजाय विकास की शक्ति के रूप में देखा। एक समय था जब असम बम धमाकों, बंद और हिंसा की खबरों से पहचाना जाता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने उग्रवाद पर कठोर प्रहार किया, शांति समझौतों को आगे बढ़ाया और विकास योजनाओं को जमीन पर उतारा।

आज असम में उग्रवादी संगठनों का खात्मा हो चुका है। सीमा सुरक्षा मजबूत हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों के भीतर भविष्य को लेकर विश्वास पैदा हुआ है, जो अब विदेशी निवेश को आकर्षित कर रहा है। मोरीगांव में टाटा समूह द्वारा स्थापित देश की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर इकाई इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। रिलायंस और अडानी समूह भी ऊर्जा और डेटा केंद्रों में भारी निवेश कर रहे हैं।

चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

हालांकि चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, जटिल कर व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाएं और निवेश संबंधी कुछ बाधाएं, लेकिन जिस तेजी से असम में माहौल बदला है, उससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र भारत की सबसे बड़ी आर्थिक कहानियों में शामिल होगा।

गुवाहाटी में होने वाली भारत-जापान शिखर वार्ता केवल दो देशों की मुलाकात नहीं, बल्कि नए भारत के उदय की कहानी है। यह उस असम की विजय गाथा है जिसने अशांति से उठकर विकास, निवेश और वैश्विक रणनीति के केंद्र तक का सफर तय किया है।

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