UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2,000 रुपये से ज्यादा पेमेंट करने पर लग सकता है चार्ज

UPI Payment Update: डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके यूपीआई से जुड़े नियमों में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अगर सरकार की तैयारी अमल में आती है तो 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा सकता है।

इसका सीधा असर दुकानदारों और पेमेंट इकोसिस्टम पर पड़ेगा, जबकि Paytm, Pine Labs जैसी कंपनियों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।

Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार Payment and Settlement Systems Act में संशोधन पर विचार कर रही है। प्रस्तावित बदलाव के बाद यूपीआई ट्रांजैक्शन पर MDR तय करने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को मिल सकता है।

2,000 से ऊपर के पेमेंट पर लग सकता है MDR

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव है कि 2,000 रुपये से अधिक के Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर 15 से 30 बेसिस पॉइंट तक MDR लगाया जाए। हालांकि, यह बदलाव लागू होने से पहले संसदीय मंजूरी और उद्योग जगत से चर्चा जैसी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

फिलहाल जनवरी 2020 से यूपीआई आधारित मर्चेंट पेमेंट पर कोई MDR नहीं लिया जाता है, जिससे ग्राहकों और व्यापारियों दोनों को मुफ्त डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल रही है।

ब्रोकरेज फर्म Jefferies की रिपोर्ट के मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन संख्या के हिसाब से कुल लेनदेन का सिर्फ 4% हैं, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी करीब 67% है। यही वजह है कि इन लेनदेन पर MDR लागू होने से डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए बड़ा रेवेन्यू तैयार हो सकता है।

रिपोर्ट का अनुमान है कि FY2028 तक इससे 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नया बाजार बन सकता है।

Paytm और Pine Labs को हो सकता है बड़ा फायदा

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो MDR से मिलने वाली राशि बैंकों, मर्चेंट एक्वायरर और पेमेंट प्लेटफॉर्म के बीच बांटी जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, पेमेंट ऐप्स को भी 5 से 10 बेसिस पॉइंट तक का हिस्सा मिल सकता है।

Jefferies का अनुमान है कि इससे Paytm (Paytm) को 300 से 700 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है, जबकि कंपनी के मुनाफे में 15% से 35% तक बढ़ोतरी संभव है। वहीं Pine Labs (Pine Labs) को भी 50 से 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

डिजिटल पेमेंट कंपनियों को मिल सकती है राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते UPI ट्रांजैक्शन के बावजूद पेमेंट कंपनियां बिना शुल्क के सेवा देने, नए व्यापारियों को जोड़ने और साइबर सुरक्षा पर भारी निवेश के कारण लंबे समय से दबाव में हैं।

ब्रोकरेज फर्म Bernstein का भी अनुमान है कि अगर 2,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 30-40 बेसिस पॉइंट MDR लागू होता है तो इंडस्ट्री को सालाना करीब 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। इससे कंपनियां अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत कर सकेंगी।

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