Lucknow News: पान की दुकान से चल रहा था मिलावटी तेल का खेल, पुलिस ने बड़े सिंडिकेट का किया खुलासा

Lucknow News: देश और दुनिया में ईंधन की बढ़ती कीमतों और संकट के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मिलावटी पेट्रोल-डीजल बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे संगठित रैकेट का संचालन एक मामूली पान की दुकान से किया जा रहा था। पुलिस ने इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड 36 वर्षीय अनिल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने पान की दुकान की आड़ में टैंकर ड्राइवरों को जाल में फंसाकर फ्यूल चोरी का यह सिंडिकेट खड़ा किया था।

क्राइम ब्रांच की रेड में पकड़े गए आरोपी

लखनऊ के मलिहाबाद स्थित संन्यासी बाग इलाके में एडिशनल डीसीपी (क्राइम) किरण यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी कर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने मौके से मुख्य आरोपी अनिल सिंह के अलावा हरदोई के रहने वाले उसके तीन साथियों अभिषेक राजपूत (25 वर्ष), धीरज सिंह (33 वर्ष) और रामतीर्थ (35 वर्ष) को धर-दबोचा।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने गोदाम से बड़ी मात्रा में अवैध ईंधन और मिलावटी केमिकल जब्त किए।

7,750 लीटर शुद्ध पेट्रोल

4,000 लीटर डीजल

1,150 लीटर पहले से तैयार मिलावटी पेट्रोल

3,200 लीटर इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट (मिलावट के लिए इस्तेमाल होने वाला रसायन)

टैंकरों से ईंधन चोरी करने और केमिकल मिलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कई बड़े उपकरण और पाइप।

एडीशनल डीसीपी (ADCP) किरण यादव ने बताया कि मास्टरमाइंड अनिल सिंह पिछले करीब छह महीने से इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहा था। अनिल ने सबसे पहले अपनी पान की दुकान पर चाय, सिगरेट और गुटखा खाने के लिए रुकने वाले फ्यूल टैंकर और ट्रकों के ड्राइवरों को निशाना बनाया।

कई महीनों तक ड्राइवरों से नजदीकी बढ़ाने और उनका विश्वास जीतने के बाद उसने उन्हें बिना मेहनत के मोटी कमाई करने का लालच दिया। उसने ड्राइवरों को समझाया कि टैंकर से कुछ लीटर तेल निकालने पर किसी को पता नहीं चलेगा। जब ड्राइवरों ने पकड़े जाने का डर जताया, तो अनिल ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उसके पास ऐसे खास सॉल्वेंट और केमिकल हैं, जिन्हें मिलाकर वह निकाले गए ईंधन की मात्रा (वॉल्यूम) को बराबर कर देगा, जिससे किसी को शक नहीं होगा।

शुरुआत में यह गिरोह बेहद सावधानी से काम कर रहा था। टैंकर ड्राइवरों को हर सफल चोरी पर मोटा कमीशन दिया जाता था। पकड़े जाने से बचने के लिए शुरुआत में हर टैंकर से केवल 5 से 6 लीटर पेट्रोल या डीजल ही चुराया जाता था, ताकि ऑयल डिपो या पेट्रोल पंप मालिकों को घटतौली का बिल्कुल शक न हो।

धीरे-धीरे मुनाफा बढ़ने पर ड्राइवरों का लालच भी बढ़ गया। इसके बाद हर टैंकर से चुराए जाने वाले ईंधन की मात्रा कई गुना बढ़ा दी गई। कुछ ही महीनों में यह साधारण सी दिखने वाली चोरी एक बड़े संगठित नेटवर्क में बदल गई, जहां ईंधन निकालने, उसमें सॉल्वेंट मिलाने और उसे बाजार में खपाने के लिए बकायदा लोगों की भूमिकाएं तय थीं। फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य खरीदारों और पेट्रोल पंप मालिकों का पता लगाया जा सके।

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