फ्रांस और स्पेन के जंगलों में भड़की आग, रिकॉर्ड गर्मी के बीच 2.5 लाख से अधिक लोग पलायन को मजबूर
Sandesh Wahak Digital Desk: यूरोप इस समय सदी की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। फ्रांस और स्पेन के विस्तृत वन क्षेत्रों में लगी आग ने तांडव मचा रखा है। हजारों फायरफाइटर दिन-रात लपटों पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी नई हीटवेव की चेतावनी ने संकट को और बढ़ा दिया है। यूरोपीय संघ के अनुसार, इस साल दावानल ने विनाश के सारे पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं और यह तबाही नवंबर की शुरुआत तक जारी रह सकती है।
स्पेनिश मीडिया एल पेस की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का और प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने देश को सतर्क रहने की सलाह दी है। स्पेन के लिए आगामी दिन बेहद चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं। मैड्रिड के पश्चिम में स्थित आविला के पहाड़ी जंगलों में भड़की आग अब तक की सबसे भयावह साबित हुई है, जिसने अकेले 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र को निगल लिया है।
मैड्रिड के उत्तर-पश्चिम की दो अन्य बड़ी आग को मिलाकर कुल 77,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि खाक हो चुकी है। स्पेन की मौसम एजेंसी (AEMET) के मुताबिक, दक्षिणी हवाएं और भीषण गर्मी इस हफ्ते के अंत तक दमकल अभियानों में रोड़ा बनी रहेंगी। इस साल स्पेन में अब तक 1.72 लाख हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं, जो बीते वर्ष के मुकाबले छह गुना अधिक है।
फ्रांस में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे विनाशकारी आपदा
ली मोंड के अनुसार, फ्रांस में भी हालात बेकाबू हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है। गिरोंद क्षेत्र में भड़की आग 42,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र को लील चुकी है, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद देश की सबसे बड़ी वन त्रासदी माना जा रहा है। अब तक फ्रांस में एहतियातन 2.2 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। सेस्तास इलाके में भारी बुलडोजरों और मशीनों की मदद से पेड़ों को काटकर फायरब्रेक बनाए जा रहे हैं ताकि लपटों को शहरों की तरफ बढ़ने से रोका जा सके। इस वर्ष फ्रांस में 1.16 लाख हेक्टेयर वनस्पति जलकर राख हो चुकी है, जो पूरे वर्ष 2025 (70,000 हेक्टेयर) की तुलना में कहीं अधिक है।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ये घटनाएं अब महज इत्तेफाक नहीं हैं, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन (Climate Emergency) की कड़वी सच्चाई है। मौसम वैज्ञानिकों ने फ्रांस के कई इलाकों में पारा 40°C के पार जाने की आशंका जताई है। अगले 24 से 48 घंटे बेहद नाजुक हैं और दमकलकर्मी समय के खिलाफ एक कठिन जंग लड़ रहे हैं।
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