उपेंद्र कुशवाहा के आगे झुकी BJP? मंत्री बेटे की कुर्सी बचाने को MLC देवेश कुमार ने दिया इस्तीफा

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का मंत्री पद बरकरार रखने के लिए बीजेपी ने अहम राजनीतिक कदम उठाया है।

BJP के विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेश कुमार (Devesh Kumar) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे अब दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।

इस फैसले को बिहार की NDA राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। क्योंकि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मंत्री बने रहने के लिए दीपक प्रकाश का किसी सदन का सदस्य होना जरूरी है।

देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट

जानकारी के मुताबिक, देवेश कुमार राज्यपाल कोटे से विधान परिषद के सदस्य थे और उनके कार्यकाल में अभी करीब आठ महीने का समय बाकी था। उनके इस्तीफे के बाद यही सीट अब दीपक प्रकाश को दिलाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधान परिषद के सभापति को देवेश कुमार का इस्तीफा सौंपा। इस दौरान देवेश कुमार भी मौजूद रहे। अब आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाया जा सकता है।

मंत्री पद बचाने के लिए उठाया गया कदम

दीपक प्रकाश 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मंत्री बनाए गए थे, जबकि उस समय वे विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। ऐसे में तय समय के भीतर उन्हें किसी सदन का सदस्य बनाना जरूरी था।

इसी जरूरत को देखते हुए बीजेपी ने अपनी ही एमएलसी सीट खाली कर दीपक प्रकाश के लिए रास्ता बनाया। माना जा रहा है कि इसी वजह से यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से अंजाम दिया गया।

दूसरी बार भी मिली थी मंत्री की जिम्मेदारी

2025 विधानसभा चुनाव के बाद बनी सरकार में दीपक प्रकाश को पहली बार पंचायती राज विभाग का मंत्री बनाया गया था। बाद में मुख्यमंत्री पद में बदलाव और नई कैबिनेट के गठन के दौरान भी उन्हें दोबारा मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई।

अब विधान परिषद की सदस्यता मिलने के बाद उनका मंत्री पद संवैधानिक रूप से सुरक्षित हो जाएगा।

राजनीतिक जानकार इस फैसले को सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाए रखने की रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को महत्व देने और सरकार में उनका प्रतिनिधित्व बनाए रखने के लिए बीजेपी के इस कदम को बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

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