पसमांदा मुसलमानों से हमदर्दी है तो भाषण नहीं, आरक्षण दें- मौलाना रशादी
Maulana Amir Rashadi: राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने पसमांदा मुसलमानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में पसमांदा समाज के हित में काम करना चाहती है तो केवल भाषण और सम्मेलन पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को उन्हें अनुसूचित जाति आरक्षण का संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए कदम उठाना चाहिए।
मौलाना रशादी ने 10 अगस्त 1950 को अनुसूचित जाति की सूची में धार्मिक प्रतिबंध लगाए जाने को पसमांदा मुसलमानों और ईसाइयों के साथ ऐतिहासिक अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि उनकी कौंसिल इस दिन को हर साल ‘अन्याय दिवस’ के रूप में मनाती है और करीब दो दशक से इस मुद्दे पर आंदोलन, जागरूकता अभियान और भूख हड़ताल करती रही है।
पसमांदा के नाम पर राजनीति क्यों
रशादी ने कहा कि पसमांदा मुसलमानों के नाम पर राजनीतिक भाषण और सम्मेलन तो हो रहे हैं, लेकिन आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर समान रूप से वंचित समुदायों को संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने भाजपा के साथ-साथ दूसरे राजनीतिक दलों पर भी मुस्लिम समाज को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। यूपी सरकार पर उन्होंने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अपराध जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए मुस्लिम समाज के खिलाफ कथित अन्याय, हिंसा और भेदभाव का माहौल बनाने का आरोप लगाया।
यूपी चुनाव में सक्रिय होगी कौंसिल
मौलाना रशादी ने कहा कि मुस्लिम समाज अब राजनीतिक बराबरी और हिस्सेदारी की बात करेगा। उन्होंने साफ कहा कि भारत ही उनका वतन है और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे।
उन्होंने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल की सक्रिय भूमिका का भी ऐलान किया। रशादी के मुताबिक, कौंसिल वंचित और कमजोर वर्गों के अधिकार, सम्मान, न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को चुनावी मुद्दा बनाएगी तथा समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर नए राजनीतिक विकल्प की दिशा में काम करेगी।

