संदेह के घेरे में देश के 30% वकील, सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी वकीलों पर केंद्र से मांगा जवाब
Sandesh Wahak Digital Desk: देश की न्यायिक व्यवस्था में फर्जी वकीलों की बढ़ती संख्या ने सुप्रीम कोर्ट की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को गंभीर संकट करार देते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि फर्जी वकीलों के खिलाफ कार्रवाई का जिम्मा सीबीआई को सौंपा जाए, ताकि पूरे देश में एक समान और प्रभावी अभियान चलाया जा सके। कोर्ट का यह सख्त रुख उस समय सामने आया है, जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रमुख का बयान सामने आया कि हर तीन में से एक वकील संदिग्ध है।
हर तीसरा वकील फर्जी
याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा के हवाले से कहा गया है कि देश में करीब 30 से 40 प्रतिशत वकील फर्जी हैं। यानी देश में पंजीकृत हर तीन वकीलों में से एक की वैधता पर संदेह है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वकालत जैसे प्रतिष्ठित पेशे में इस तरह की धोखाधड़ी से न केवल आम नागरिकों को धोखा हो रहा है, बल्कि पूरी न्यायिक व्यवस्था की गरिमा भी खतरे में पड़ रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि ये फर्जी वकील न्यायालयों का दुरुपयोग कर वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।
1000 से अधिक फर्जी वकीलों का खुलासा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राजा चौधरी ने अदालत को बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट परिसर में अकेले 1000 से अधिक फर्जी वकील सक्रिय हैं। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कफील खान बनाम उत्तर प्रदेश मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि वकालत के पेशे में माफिया तत्व घुस गए हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बार काउंसिल की सिफारिश पर 68 वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और लगभग 100 और मामले दर्ज किए जाने की तैयारी है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई को चरणबद्ध तरीके से अमल में लाया जाएगा ताकि न्यायिक प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
देश में कितने वकील और कैसे होती है जांच
कानून मंत्रालय के अगस्त 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में वर्तमान में लगभग 20 लाख पंजीकृत अधिवक्ता हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार प्रतिवर्ष करीब 80,000 नए वकील इस पेशे में शामिल हो रहे हैं। वकालत की डिग्री के बाद बार काउंसिल द्वारा आयोजित एलिजिबिलिटी टेस्ट (AIBE) पास करना अनिवार्य है। इसके अलावा, सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस वेरिफिकेशन रूल्स-2015 के तहत हर पांच साल में वकीलों को अपनी प्रैक्टिस का विवरण जमा करना होता है। गलत जानकारी देने या सत्यापन में विफल रहने पर बार काउंसिल के पास कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन अब तक इस नियम का सख्ती से पालन न होने से समस्या गंभीर हो गई है।

