पूर्व जज यशवंत वर्मा कैश कांड में लोकसभा में पेश हुई 3 सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट
Sandesh Wahak Digital Desk: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से भारी मात्रा में बरामद नकदी के मामले में गठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा के पटल पर रख दी गई। संसद के मानसून सत्र 2026 के समापन से ठीक एक दिन पहले प्रस्तुत इस विस्तृत रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी प्रकार की बाहरी साजिश के प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, रिपोर्ट में सख्त रुख अपनाते हुए यह भी रेखांकित किया गया है कि किसी न्यायाधीश के आवास से इतनी बड़ी रकम का मिलना एक अत्यंत गंभीर मामला है, जिसे कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत तैयार की गई इस रिपोर्ट में तमाम मौखिक गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच प्रक्रिया के दौरान पूर्व जज यशवंत वर्मा समिति के समक्ष तीखे सवालों के स्पष्ट उत्तर देने से कतराते नजर आए। उल्लेखनीय है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को गठित इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार ने की थी, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल थे। समिति ने मई 2026 में ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी थी।
आग बुझाने के दौरान मिला था कैश का खजाना
यह पूरा विवाद 14 मार्च, 2025 की देर रात शुरू हुआ था, जब नई दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले के स्टोर रूम में अचानक आग लग गई थी। मौके पर पहुंचे दमकलकर्मियों को राहत कार्य के दौरान भारी मात्रा में अधजले और सुरक्षित नोटों के बंडल मिले थे। घटना के वक्त वे दिल्ली हाईकोर्ट में तैनात थे, लेकिन विवाद गहराने पर उन्हें वापस मूल कैडर इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया, जहां बाद में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
इससे पूर्व तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना की आंतरिक न्यायिक समिति ने भी माना था कि उस स्टोर रूम पर पूर्व जज का ही नियंत्रण था। जुलाई 2025 में संसद के 200 से अधिक सांसदों द्वारा महाभियोग का नोटिस दिए जाने के बाद इस वैधानिक समिति का गठन किया गया था।
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