लखनऊ में अवैध निर्माणों का सर्वे करने पहुंची सुप्रीम कोर्ट की टीम, अलीगंज से वेलनेस सिटी तक लिया जायजा

Lucknow News : सुप्रीम कोर्ट की ओर से नामित एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) की छह सदस्यीय टीम ने शनिवार को लखनऊ में अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग का सर्वे किया। टीम ने अलीगंज में अग्निकांड के बाद ध्वस्त की गई अवैध इमारत के साथ-साथ आवासीय भू-उपयोग में बने व्यावसायिक भवनों पर की गई कार्रवाई का भी सत्यापन किया।

इसके अलावा टीम ने गोमती नगर विस्तार के सरसवां इलाके और वेलनेस सिटी में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की ओर से ध्वस्त किए गए अवैध निर्माण और प्लॉटिंग का भी मौके पर जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान IIT दिल्ली के एक प्रोफेसर भी टीम के साथ मौजूद रहे।

अलीगंज में 51 अवैध व्यावसायिक निर्माण चिन्हित

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में लोकनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य सरकार मामले की सुनवाई के दौरान लखनऊ समेत देश के कई बड़े शहरों में अवैध निर्माण के मामलों पर सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने 22 जून 2026 को अलीगंज के सेक्टर-डी में आवासीय भूखंड पर बने अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में हुए अग्निकांड को गंभीरता से लिया था।

सुनवाई के दौरान LDA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि अलीगंज क्षेत्र में आवासीय भू-उपयोग के विपरीत और निर्धारित मानकों के खिलाफ बने 51 व्यावसायिक निर्माण चिन्हित किए गए हैं। इन निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी के जरिए अलीगंज समेत लखनऊ के दूसरे इलाकों में अवैध निर्माणों का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे।

गोमती नगर विस्तार और वेलनेस सिटी में भी निरीक्षण

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में शनिवार को एमिकस क्यूरी की छह सदस्यीय टीम लखनऊ पहुंची। टीम ने सबसे पहले अलीगंज में अवैध निर्माणों के खिलाफ की गई ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई का जायजा लिया।

इसके बाद टीम गोमती नगर विस्तार में पुलिस मुख्यालय के पीछे सरसवां इलाके में पहुंची, जहां पहले ध्वस्त किए गए अवैध निर्माणों का निरीक्षण किया गया। टीम ने वेलनेस सिटी में भी अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ हुई कार्रवाई को मौके पर जाकर देखा।

निरीक्षण के दौरान LDA के अपर सचिव सीपी त्रिपाठी और ज्ञानेन्द्र वर्मा समेत संबंधित जोनल अधिकारी मौजूद रहे।

सर्वे पूरा होने के बाद एमिकस क्यूरी की टीम अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

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