सत्य निकेतन हादसा के बाद एक्शन में प्रशासन, बिना पिलर की बनी चार मंजिला बिल्डिंग को ढहाने का काम शुरू
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने और सात लोगों की जान जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए आसपास के असुरक्षित निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे वाली इमारत से बिल्कुल सटी चार मंजिला इमारत को खतरनाक घोषित किए जाने के बाद अब उसे चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के दौरान यह इमारत एक तरफ झुक गई थी और इसके कभी भी जमींदोज होने का जोखिम बना हुआ था। खतरे को देखते हुए पूरी इमारत को खाली कराकर नियंत्रित तरीके से गिराने की प्रक्रिया जारी है।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि असुरक्षित घोषित की गई इस चार मंजिला इमारत में एक भी पिलर (खंभा) नहीं था। आसपास के इलाके को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए मौके पर मौजूद रेस्क्यू व टेक्निकल टीम पहले लोहे के बीम और जैक लगाकर ढांचे को स्थिर कर रही है। इमारत को अचानक गिराने के बजाय ऊपर की मंजिल से शुरू करते हुए नीचे की ओर तोड़ा जा रहा है। इसके लिए छोटी हाइड्रोलिक कटर मशीनों व हथौड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आसपास की अन्य दुकानों व केमिस्ट शॉप्स को भी अतिरिक्त सपोर्ट दिया गया है।
मलबे से निकाले गए 12 लोग
सत्य निकेतन में हुए इस भीषण हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार 27 घंटे तक चला। रेस्क्यू टीमों ने अथक प्रयास कर मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला, जिनमें से सात लोगों की इलाज और दम घुटने से मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र में वर्षों से चल रहे अवैध और जर्जर निर्माणों को लेकर दिल्ली नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीजी मालिक, पत्नी और बेटा गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीजी मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने हरिराम व उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत और महेश को 2 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है। पुलिस अब लेबर कॉन्ट्रैक्टर और पीजी ऑपरेटरों की तलाश कर रही है। दूसरी ओर, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सभी जोनों के कार्यकारी अभियंताओं को 10 सितंबर तक अपने क्षेत्रों की जर्जर इमारतों का विस्तृत सर्वे कर रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय में हलफनामे के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
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