थाने में 4 लोगों को अवैध हिरासत में रखने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, SHO के वेतन से 65 का मुआवजा देने का आदेश
Prayagraj News: देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया के अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने पुलिस अधिकारियों के जवाब पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पीड़ितों को कुल 65,000 रुपये का मुआवजा देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजे की यह पूरी राशि किसी सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि दोषी SHO के वेतन से वसूल की जाएगी।
10 दिनों तक बिना कागजी कार्रवाई थाने में बंद रखने का आरोप
मामला महेंद्र गौर और तीन अन्य लोगों द्वारा दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने 13 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच उन्हें गौरी बाजार थाने में अलग-अलग अवधि के लिए अवैध रूप से बंद रखा। कोर्ट के आदेश पर जब थाने की सीसीटीवी फुटेज मांगी गई, तो पुलिस ने कैमरे खराब होने की बात कही। अदालत ने जब जांच की तो पाया कि कैमरे खराब होने की कोई प्रविष्टि जनरल डायरी में दर्ज ही नहीं की गई थी, जिस पर पीठ ने पुलिस की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए।
एसपी की माफी पर कोर्ट ने कहा- अदालत से नहीं, जनता से मांगिए माफी
मामले की सुनवाई के दौरान देवरिया के पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा और संबंधित SHO अदालत के समक्ष पेश हुए। जब SP ने सीसीटीवी खराब होने की जानकारी न होने की बात कहकर बिना शर्त माफी मांगी, तो हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, माफी अदालत से नहीं, बल्कि उस जनता से मांगिए जिसे सुरक्षा देने के बजाय परेशान किया जा रहा है। कोर्ट ने SP से पूछा कि रिकॉर्ड में हेरफेर और गंभीर लापरवाही बरतने वाले SHO को अब तक निलंबित या अनुशासित क्यों नहीं किया गया?
चारों पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि चार याचिकाकर्ताओं में से तीन को ₹20-20 हजार और एक को 5 हजार रुपये की मुआवजा राशि तुरंत भुगतान की जाए, जो बाद में SHO के वेतन से काटी जाएगी। इसके अलावा, अदालत ने देवरिया के थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए जारी 46.46 लाख रुपये के बजट पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि काम पूरा न होने के बावजूद एजेंसी को पूरा भुगतान क्यों किया गया और उस ठेकेदार कंपनी को अब तक ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया?

